CGPSC मेंस रिजल्ट: उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग खारिज, हाईकोर्ट बोला- री-इवैल्यूएशन का कोई नियम नहीं

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC Mains परीक्षा परिणाम और उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन (Re-evaluation) की मांग को लेकर दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्जांच का कोई प्रावधान नहीं है और याचिकाकर्ता मूल्यांकन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को साबित करने में विफल रहे हैं।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ताओं ने 265 पदों के लिए आयोजित CGPSC मेंस परीक्षा के बाद 31 अगस्त 2026 को जारी हुए परिणाम को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि नियमानुसार पदों के सापेक्ष 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों का ही चयन किया है। इसी आधार पर उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन की मांग की गई थी।
PSC का पक्ष और हाईकोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान लोक सेवा आयोग (PSC) ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए शपथपत्र में बताया कि नियमों के तहत परीक्षा में अनारक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 33% और आरक्षित वर्ग के लिए 23% अंक लाना अनिवार्य है। मुख्य परीक्षा में केवल 608 अभ्यर्थी ही इस न्यूनतम अर्हता अंक (Cut-off Marks) को प्राप्त कर सके।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘राम विजय सिंह मामले’ का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि:
शैक्षणिक और विशेषज्ञ मामलों में अदालतों को दखल देने से बचना चाहिए।
वर्तमान नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्जांच का कोई प्रावधान नहीं है।
केवल कम अंक आने या संदेह के आधार पर दोबारा मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता।
608 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू फिलहाल स्थगित
यद्यपि हाईकोर्ट से आयोग को राहत मिल गई है, लेकिन CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा के अगले चरण (इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन) को फिलहाल स्थगित कर दिया है। आयोग ने कहा है कि कम संख्या में अभ्यर्थियों का चयन किसी मानवीय या तकनीकी त्रुटि के कारण नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों द्वारा न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त न कर पाने की वजह से हुआ है।
इंटरव्यू की नई तिथियों की घोषणा जल्द ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी। अभ्यर्थियों को नियमित रूप से आधिकारिक पोर्टल विजिट करने की सलाह दी गई है।

