जीएसटी विभाग की दो भर्ती परीक्षाएं निरस्त

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग ने वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक पद पर भर्ती के लिए वर्ष 2021 और 2022 में आयोजित दो सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है। जांच में भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद दोनों परीक्षाओं को प्रारंभ से ही शून्य घोषित करते हुए उनसे संबंधित चयन प्रक्रियाओं और नियुक्ति आदेशों को रद्द कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप इन परीक्षाओं के आधार पर नियुक्त सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

राज्य कर आयुक्त कार्यालय द्वारा लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को राज्य कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त करने के लिए 19 दिसंबर 2021 और 26 जून 2022 को परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। इनके परिणामस्वरूप दिसंबर 2021 और जुलाई 2022 में चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे। बाद में दोनों परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर जांच समिति गठित की गई। समिति ने दस्तावेजों की जांच के बाद 3 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें आरक्षण, पात्रता निर्धारण, उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन और अंतिम चयन सहित कई स्तरों पर खामियां सामने आईं।

आरक्षण रोस्टर और मेरिट सूची तैयार करने में खामियां

जांच समिति के अनुसार, दोनों परीक्षाओं से पहले आरक्षण रोस्टर के आधार पर पदों का वर्गवार निर्धारण नहीं किया गया था। इससे आरक्षण संबंधी प्रावधानों और सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की व्यवस्था प्रभावित हुई। परीक्षार्थियों की उपस्थिति का उचित पंजी संधारित नहीं किया गया और न ही समेकित परिणाम तथा अंक तालिकाएं तैयार की गईं। इसके कारण अभ्यर्थियों की वास्तविक मेरिट का निष्पक्ष और विश्वसनीय आकलन करना कठिन हो गया।

वर्ष 2021 में पात्रता की निर्णायक तिथि बदलने का मामला

जांच में वर्ष 2021 की परीक्षा में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने की तारीख में बदलाव का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, पात्रता की निर्णायक तिथि परीक्षा वर्ष की पहली जनवरी के स्थान पर 15 नवंबर 2021 निर्धारित की गई थी। समिति ने माना कि इस बदलाव से कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने की स्थिति बनी और समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों के लिए समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हुआ।

उत्तर-पुस्तिकाओं में समान उत्तर और पुनर्मूल्यांकन पर सवाल

जांच के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में कई जगह एक जैसे उत्तर पाए गए। इसके लिए संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने के साथ उत्तर-पुस्तिकाओं पर अभ्यर्थियों की पहचान गोपनीय रखने के लिए कोडिंग व्यवस्था भी नहीं अपनाई गई थी। इससे परीक्षा की गोपनीयता और मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल उठे।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के बाद उनके अंक बढ़े और इसी आधार पर उनका चयन हुआ। वर्ष 2022 की परीक्षा में चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में भागीदारी भी अनियमितता के रूप में सामने आई। इससे मूल्यांकन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

उत्तर-पुस्तिकाओं के रिकॉर्ड में भी विसंगतियां

जांच समिति ने दोनों परीक्षाओं में उत्तर-पुस्तिकाओं की संख्या से जुड़े अभिलेखों में भी अंतर पाया। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, खरीदी गई उत्तर-पुस्तिकाओं की कुल संख्या की तुलना में इस्तेमाल की गई और शेष बची उत्तर-पुस्तिकाओं की संयुक्त संख्या अधिक थी। इस विसंगति के संबंध में संतोषजनक दस्तावेजी स्पष्टीकरण नहीं मिल सका। इससे परीक्षा सामग्री के रखरखाव और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था पर भी सवाल उठे।

व्यापक अनियमितताओं के चलते पूरी चयन प्रक्रिया रद्द

जांच में सामने आई खामियों के संयुक्त प्रभाव से परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्षता, गोपनीयता, मेरिट निर्धारण और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही गई। विभाग ने माना कि इन प्रक्रियाओं में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के सिद्धांतों का समुचित पालन सुनिश्चित नहीं हो सका।

विभाग ने केवल अनियमितताओं से लाभान्वित अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई करने, उत्तर-पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने और संशोधित मेरिट सूची तैयार करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया। हालांकि, मूल अभिलेखों की स्थिति और प्रक्रियागत खामियों की व्यापकता के कारण प्रभावित तथा अप्रभावित अभ्यर्थियों की विश्वसनीय पहचान संभव नहीं पाई गई। इसी आधार पर दोनों परीक्षाओं और उनसे जुड़ी संपूर्ण चयन प्रक्रियाओं को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

तीन नियुक्ति आदेश निरस्त, मूल पदों पर होगी वापसी

राज्य कर आयुक्त कार्यालय के आदेश के अनुसार, 19 दिसंबर 2021 और 26 जून 2022 को आयोजित दोनों सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं को प्रारंभ से शून्य घोषित कर दिया गया है। इनके आधार पर 27 दिसंबर 2021, 30 दिसंबर 2021 और 1 जुलाई 2022 को जारी तीन नियुक्ति आदेश भी निरस्त कर दिए गए हैं।

आदेश के तहत इन परीक्षाओं के माध्यम से वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक बने सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनके पूर्व मूल पदों और मूल पदस्थापना पर प्रत्यावर्तित किया जाएगा। उन्हें निरीक्षक पद पर नियुक्ति से पहले वाले पद पर कार्यरत माना जाएगा।

विभाग के इस निर्णय का उद्देश्य भर्ती एवं चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता, संवैधानिक प्रावधानों के अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।