जर्जर और भवनविहीन स्कूलों की जानकारी न देने पर छत्तीसगढ़ के 32 डीईओ को नोटिस, रुक सकता है अक्टूबर का वेतन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की बदहाल और जर्जर स्थिति को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने बड़ी कड़ा रुख अपनाया है। शासन द्वारा मांगी गई भवनविहीन और मरम्मत योग्य स्कूलों की जानकारी समय-सीमा में न भेजने पर बलौदाबाजार को छोड़कर प्रदेश के सभी 32 जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

संचालनालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब और पूरा डेटा नहीं मिला, तो संबंधित डीईओ के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम-1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उनका अक्टूबर माह का वेतन रोका जा सकता है।

केवल बलौदाबाजार ने दी पूरी रिपोर्ट, 32 जिले पिछड़े

लोक शिक्षण संचालनालय ने 7 सितंबर को प्रदेश के सभी 33 जिलों के डीईओ को एक सप्ताह के भीतर जर्जर, मरम्मत योग्य और भवनविहीन स्कूलों का पूरा ब्योरा भेजने के निर्देश दिए थे।

  • एकमात्र बलौदाबाजार: केवल बलौदाबाजार जिले ने समय पर पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

  • बलरामपुर की आधी जानकारी: बलरामपुर डीईओ ने सिर्फ भवनविहीन स्कूलों का डेटा भेजा, लेकिन मरम्मत योग्य स्कूलों की सूची नहीं दी।

  • 31 जिलों की पूरी लापरवाही: बाकी 31 जिलों के अधिकारियों ने तय समय बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट नहीं भेजी, जिसे संचालनालय ने शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही माना है।

प्रदेश के 8 हजार से अधिक स्कूलों को मरम्मत की दरकार

जिलों से अपडेटेड डेटा न मिलने के कारण राज्य स्तर पर बजट और मरम्मत की प्राथमिकता तय करने में बाधा आ रही है। प्रदेश में करीब 47 हजार सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनकी स्थिति चिंताजनक है:

  • 8,106 स्कूल: आंशिक या बड़े स्तर पर मरम्मत की सख्त जरूरत है।

  • 3,500 स्कूल भवन: अत्यधिक जर्जर या असुरक्षित घोषित हैं।

  • 1,000+ भवन: डिस्मेंटल (तोड़ने योग्य) हैं, जिनकी जगह नए कमरों की स्वीकृति मिल चुकी है।

  • 200 से 250 स्कूल: पूरी तरह भवनविहीन हैं, जो किराए के कमरों, पंचायत भवनों या अस्थायी शेड में चलने को मजबूर हैं।

संचालनालय ने नोटिस में कहा है कि मांगी गई जानकारी अत्यंत संवेदनशील और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। अब देखना होगा कि 3 दिन की मोहलत में कितने जिले अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा कर पाते हैं।