मानसून 2026 की विदाई के बाद देश के 51% हिस्से में सूखे जैसे हालात, जानिए क्या हैं प्रमुख कारण और प्रभाव

नई दिल्ली। वर्ष 2026 में मानसून की विदाई के बाद देश के सामने एक बड़ा जल और कृषि संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल देश के लगभग 51% हिस्से में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। एक तरफ जहां कुछ क्षेत्रों में भारी तबाही वाली बारिश हुई, वहीं देश का आधा हिस्सा पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है।
1. कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास
कागजी आंकड़े: राष्ट्रीय स्तर पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून सीजन में औसतन केवल 13% बारिश की कमी दर्ज की गई है, जो पहली नजर में सामान्य लगती है।
वास्तविक स्थिति: बारिश के गंभीर असमान वितरण (Uneven Distribution) के कारण देश का आधा से अधिक हिस्सा सूखे की चपेट में आ गया है। औसत आंकड़े जमीनी स्तर की गंभीर स्थिति को छिपा रहे हैं।
2. क्षेत्रीय असमानता: कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा
मानसून 2026 के दौरान मौसम का चरम रूप देखने को मिला है:
अत्यधिक बारिश: देश के कुछ हिस्सों में बीते 20 वर्षों की सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई।
सूखे के हालात: वहीं दूसरी ओर, कई प्रमुख राज्यों और जिलों में बीते 17 वर्षों की सबसे कम बारिश दर्ज की गई है।
3. ये राज्य हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
महाराष्ट्र: राज्य के कई जिले मानसून की भारी कमी के कारण गंभीर सूखे के संकट से जूझ रहे हैं।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात: इन राज्यों में बड़े पैमाने पर Rainfall Deficit (बारिश की कमी) दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय जल संसाधनों, बांधों और खेती पर सीधा असर पड़ा है।
4. संभावित प्रभाव और आने वाली मुसीबतें
खरीफ फसलों पर बुरा असर: बारिश के इस असमान पैटर्न के कारण खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, दलहन) के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
गंभीर जल संकट: जलाशयों का जलस्तर न भरने और भूजल (Groundwater) के रीचार्ज न होने से आने वाले रबी सीजन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में भयंकर किल्लत हो सकती है।

