2026 अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा विवाद: 26 राज्यों में वोटर लिस्ट से हटे 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम

वाशिंगटन / नई दिल्ली: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले आगामी मिडटर्म (मध्यावधि) चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के 26 राज्यों में लगभग 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं (Indian Americans) के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इस कदम ने अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है।

इस पूरे मामले, इसके पीछे की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण नीचे दिया गया है:

1. मुख्य मामला: 2 लाख भारतवंशी मतदाताओं के नाम हटाए गए

  • प्रभावित क्षेत्र: यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन 26 राज्यों में हुई है, जहाँ रिपब्लिकन पार्टी (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी) की सरकारें हैं।

  • समुदाय पर प्रभाव: अमेरिका में पंजीकृत कुल लगभग 21 लाख भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में से करीब 10% नाम सूची से बाहर हो गए हैं।

2. ट्रम्प प्रशासन का तर्क और ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (SAVE America Act)

  • प्रशासन का पक्ष: ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई वोटर सूचियों के शुद्धिकरण, अयोग्य एवं अवैध मतदाताओं को हटाने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

  • सेव अमेरिका एक्ट (SAVE America Act): ट्रम्प प्रशासन इस कड़े विधेयक का समर्थन कर रहा है, जो अमेरिकी संसद के निचले सदन (House of Representatives) से पास हो चुका है।

    • कड़े नियम: इसके तहत नए वोटर रजिस्ट्रेशन के दौरान जन्म प्रमाण पत्र या अमेरिकी पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के माध्यम से नागरिकता साबित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

    • सख्त पहचान नियम: मतदान केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से वोट देने या डाक (Mail-in Ballot) के जरिए मतदान करने, दोनों स्थितियों में कड़े पहचान पत्र (Photo ID) नियम लागू किए गए हैं।

  • डेमोक्रेटिक पार्टी और आलोचकों का आरोप: डेमोक्रेटिक पार्टी का दावा है कि इन कड़े नियमों से लाखों वैध अमेरिकी नागरिक (विशेषकर अल्पसंख्यक और प्रवासी) मताधिकार से वंचित हो रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम आगामी मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

3. रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी चिंताएं और समीकरण

  • भारतवंशियों का झुकाव: पिछले चुनावों में लगभग 65% भारतीय-अमेरिकियों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार का समर्थन किया था। ऐसे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के नाम सूची से हटने का सीधा राजनीतिक लाभ रिपब्लिकन पार्टी को मिल सकता है।

  • ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग: AP-NORC सर्वे के अनुसार, वर्तमान में केवल 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं। महंगाई पर उनकी अप्रूवल रेटिंग गिरकर 17% तक आ गई है, और 65% से अधिक अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए उनकी नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं।

  • पार्टी के भीतर दूरी: घटती लोकप्रियता के कारण कई रिपब्लिकन उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार सामग्री से ट्रम्प और ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) एजेंडे से दूरी बनाते दिख रहे हैं।

4. 2026 के मिडटर्म चुनाव क्यों हैं बेहद महत्वपूर्ण?

3 नवंबर 2026 को होने वाले ये मिडटर्म चुनाव अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में शक्ति संतुलन तय करेंगे:

  • सीनेट (Senate): कुल 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं (जहाँ वर्तमान में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें हैं)।

  • हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House): सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं।

  • बहुमत की अहमियत: यदि रिपब्लिकन पार्टी संसद के किसी भी सदन में अपना बहुमत खो देती है, तो ट्रम्प प्रशासन के लिए अपने कार्यकाल के शेष दो वर्षों में कोई भी नया कानून या नीति पारित कराना बेहद कठिन हो जाएगा।