ग्लोबल हलचल: अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम पर बनी सहमति! मिल सकता है ₹28.5 लाख करोड़ का फंड

वाशिंगटन/तेहरान: लंबे समय से चल रहे अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव को लेकर एक बेहद बड़ी और राहत भरी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 60 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire Agreement) को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसकी शर्तें काफी चौंकाने वाली हैं।

समझौते की बड़ी शर्तें और भारी-भरकम फंड की पेशकश

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान को एक बहुत बड़ा आर्थिक पैकेज मिल सकता है:

  • ₹28.5 लाख करोड़ का पैकेज: ईरान के पुनर्निर्माण प्रोग्राम (Reconstruction Program) के लिए लगभग 300 अरब डॉलर (करीब 28.5 लाख करोड़ रुपये) का फंड दिए जाने का प्रस्ताव है।

  • अमेरिकी निवेश की राह खुली: अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिकी कंपनियों को ईरान में निवेश करने की मंजूरी दी जाएगी।

  • समुद्री प्रतिबंध हटेंगे: अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा, जिससे होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के जरिए होने वाला वैश्विक व्यापार फिर से सुगम हो सकेगा। ईरान भी इस रास्ते से अगले 30 दिनों में माइंस (समुद्री बारूद) हटाने पर राजी हुआ है।

परमाणु कार्यक्रम पर डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा दावा, ईरान का इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमत हो गए हैं। ट्रम्प के मुताबिक, ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसके पहाड़ों के नीचे छिपे ठिकानों में मौजूद ‘एनरिच्ड यूरेनियम’ को नष्ट किया जाएगा।

ईरान का रुख: दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि समझौते के ड्राफ्ट में परमाणु सामग्री नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है और वे सिर्फ युद्ध रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

लेबनान में स्थिति अभी भी चिंताजनक: UN की चेतावनी

इस संभावित समझौते के बीच इजरायल और लेबनान सीमा पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

  • बच्चों पर संकट: संयुक्त राष्ट्र (UNICEF) की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में युद्धविराम के बावजूद पिछले एक हफ्ते में हर 24 घंटे में औसतन 11 बच्चे हमलों का शिकार हो रहे हैं।

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि हमलों के कारण लेबनान के 16 अस्पताल और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे वहां गंभीर हेल्थ क्राइसिस पैदा हो गया है।

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