अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: पूर्व महिला माओवादियों ने जवानों को बांधी राखी, विश्वास और शांति का दिया संदेश
नारायणपुर। अबूझमाड़ में कभी हिंसा और भय का पर्याय रहे हालात अब धीरे-धीरे बदलते नजर आ रहे हैं। रक्षाबंधन के मौके पर इसका भावनात्मक उदाहरण नारायणपुर के डीआरजी परिसर में देखने को मिला, जहां आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुकी महिला माओवादियों ने पुलिस जवानों और अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी।
यह पहल महज एक पर्व मनाने तक सीमित नहीं रही। राखी के इस रिश्ते ने उन लोगों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास की नई तस्वीर पेश की, जिनके बीच कभी संघर्ष और दूरी का माहौल था। आत्मसमर्पित महिलाओं ने जवानों को रक्षा-सूत्र बांधकर सम्मान, अपनत्व और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का संदेश दिया।
पुलिस अधिकारियों को भी बांधी राखी
डीआरजी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पित महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय साबद्रा, अजय कुमार और ऐश्वर्य चंद्राकर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी।
इस दौरान परिसर का माहौल पूरी तरह पारिवारिक नजर आया। आत्मसमर्पण के बाद समाज की मुख्यधारा में कदम रख चुकी महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ सहजता से रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
एसपी बोले- विश्वास के साथ मुख्यधारा में लौटने वालों को मिले सम्मान
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम और भाईचारे के साथ विश्वास तथा सुरक्षा की भावना से जुड़ा पर्व है। उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने वाले लोगों को समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के भीतर सुरक्षा और भरोसे की भावना पैदा करना पुलिस के साथ-साथ पूरे समाज की जिम्मेदारी है। संवाद और सहयोग के जरिए ही स्थायी शांति की नींव मजबूत की जा सकती है।
राखी ने दिया बदलते बस्तर का संदेश
डीआरजी परिसर में हुआ यह आयोजन अबूझमाड़ में बदलते सामाजिक माहौल का प्रतीक बनकर सामने आया। कभी बंदूक और संघर्ष से जुड़े रहे लोगों का सुरक्षा बलों के साथ रक्षाबंधन मनाना इस बात की ओर इशारा करता है कि विश्वास और संवाद की कोशिशें दूरियां कम कर सकती हैं।
रक्षाबंधन के इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि हिंसा से दूर होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का रास्ता खुला है। आत्मसमर्पित महिलाओं और पुलिस के बीच बने इस आत्मीय रिश्ते को बस्तर में शांति और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
नारायणपुर में रक्षाबंधन के इस आयोजन ने अबूझमाड़ की बदलती तस्वीर को एक मानवीय चेहरा दिया—जहां कभी संघर्ष की पहचान थी, वहां अब विश्वास, अपनत्व और सामान्य जीवन की उम्मीद दिखाई दे रही है।
