मानसून में निखरा धमतरी का सौंदर्य, गंगरेल से नरहरा तक उमड़ रहे सैलानी; पर्यटन गतिविधियों को मिला नया विस्तार
धमतरी। बारिश के मौसम में धमतरी जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की खूबसूरती अपने चरम पर पहुंच गई है। जलाशयों में बढ़ा जलस्तर, हरियाली से ढकी पहाड़ियां और झरनों की कल-कल पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही है। गंगरेल, रुद्री, माडमसिल्ली, नरहरा, सिहावा और जबर्रा हिल्स जैसे पर्यटन स्थल इन दिनों सैलानियों की पसंद बने हुए हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य के साथ एडवेंचर गतिविधियों के बढ़ते दायरे ने धमतरी को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्रों की कतार में ला खड़ा किया है। खासतौर पर गंगरेल और रुद्री क्षेत्र में कयाकिंग, बोटिंग और अन्य वाटर स्पोर्ट्स शुरू होने से युवाओं तथा रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
गंगरेल से माडमसिल्ली तक आकर्षण ही आकर्षण
धमतरी की पर्यटन विशेषता इसकी प्राकृतिक विविधता है। ‘मिनी गोवा’ के नाम से लोकप्रिय गंगरेल जलाशय विशाल जलराशि, मनोरम सूर्यास्त और जलक्रीड़ा गतिविधियों के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां परिवारों के साथ आने वाले सैलानियों से लेकर युवाओं तक की अच्छी खासी मौजूदगी देखी जा रही है।
गंगरेल के समीप रुद्री डैम भी सप्ताहांत में पर्यटकों से गुलजार रहता है। शांत वातावरण के बीच बोटिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियां इसे परिवार और एडवेंचर दोनों तरह के पर्यटन के लिए उपयोगी बना रही हैं।
माडमसिल्ली बांध अपनी विशिष्ट साइफन प्रणाली और स्थापत्य विशेषताओं के लिए जाना जाता है। वहीं नरहरा जलप्रपात घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित होने के कारण प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सिहावा का श्रृंगऋषि पर्वत, कर्णेश्वर महादेव, सप्तऋषि और जबर्रा हिल्स भी जिले की पर्यटन विविधता को विस्तार देते हैं।
भरपूर जलभराव ने बढ़ाई पर्यटन की रौनक
इस वर्ष जलाशयों में पर्याप्त पानी होने से पर्यटन स्थलों का प्राकृतिक आकर्षण और बढ़ गया है। रविशंकर सागर यानी गंगरेल जलाशय में 90.72 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। यहां जलस्तर 347.95 मीटर यानी 1141.62 फीट और पानी की आवक 3548 क्यूसेक बताई गई है।
मुरूमसिल्ली जलाशय में 98.82 प्रतिशत पानी भर चुका है। इसका जलस्तर 376.22 मीटर यानी 1234.37 फीट दर्ज किया गया है। इसी तरह दुधावा जलाशय में 82.37 प्रतिशत तथा सोंढूर जलाशय में 68.90 प्रतिशत जलभराव दर्ज है। पर्याप्त जलराशि ने बांधों के आसपास के प्राकृतिक नजारों को और मनमोहक बना दिया है।
जलाशयों से सिंचाई के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा
धमतरी और महानदी जलाशय परियोजना से जुड़े जलाशय केवल सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहे, बल्कि इनके आसपास विकसित पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।
पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार हुए हैं। गाइड सेवा, बोट संचालन, खान-पान, स्थानीय उत्पाद और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में लोगों को आय के नए साधन मिल रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
सुरक्षा और सुविधाओं पर प्रशासन का फोकस
पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और जनसुविधाओं को प्राथमिकता दी है। वाटर स्पोर्ट्स के दौरान लाइफ जैकेट का उपयोग अनिवार्य किया गया है और प्रशिक्षित गाइडों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है।
इसके अलावा पार्किंग, उद्यान, विश्राम स्थल, पेयजल और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है। पर्यटन स्थलों को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
प्रकृति और रोमांच का संगम बना धमतरी
धमतरी की पहचान अब केवल जलाशयों और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रह गई है। प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़, जंगल, झरने और आधुनिक वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का मेल जिले को एक नए पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।
मानसून के दौरान यहां का बदला हुआ प्राकृतिक स्वरूप पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय भागीदारी के साथ धमतरी छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख नेचर और एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
