टीचर्स डे पर पीएम मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से की बातचीत
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों से संवाद किया। शनिवार को पीएम मोदी ने उन 48 स्कूली शिक्षकों से बातचीत की, जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है। इस बातचीत का करीब पांच मिनट का वीडियो पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल पर जारी किया गया।
पब्लिक स्पीकिंग पर शिक्षक से पूछा सवाल
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक महिला शिक्षक से बच्चों को पब्लिक स्पीकिंग सिखाने के अनुभव के बारे में पूछा। उन्होंने शिक्षक से कहा कि अगर मैं आपका विद्यार्थी हूं और एक अच्छा स्पीकर बनना चाहता हूं, तो मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
शिक्षक ने जवाब दिया कि सबसे पहले आत्मविश्वास यानी कॉन्फिडेंस जरूरी है। इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए पूछा कि आखिर यह कॉन्फिडेंस आएगा कैसे? शिक्षक ने बताया कि आत्मविश्वास के लिए लगातार अभ्यास करना पड़ता है।
तीन विभागों से 82 शिक्षक और एजुकेटर्स चयनित
इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए तीन अलग-अलग विभागों से कुल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स का चयन किया गया है। इनमें 48 स्कूली शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक से 21 फैकल्टी सदस्यों तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से 13 स्किल ट्रेनर्स को पुरस्कार के लिए चुना गया है।
पीएम मोदी की बातचीत में तीन अहम मुद्दे
स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता: प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच स्क्रीन टाइम अब एक तरह की आदत या लत का रूप लेता जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को वास्तविक खेलों से जोड़ना इस समस्या से बाहर निकलने में मददगार हो सकता है। मैदान में जाकर खेलना बच्चों को स्क्रीन से दूर करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
ड्रेस कोड पर जागरूकता जरूरी: बातचीत में ड्रेस कोड का मुद्दा भी उठा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े शहरों और कुछ विश्वविद्यालयों में इस तरह के मामले सामने आते हैं। कई बार इसके पीछे जागरूकता की कमी होती है और कभी-कभी नियमों को पर्याप्त स्पष्टीकरण के बिना लागू कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में संवाद और समझ जरूरी है।
बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर नजर: प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों के बदलते व्यवहार को समझने और उनके मन में पैदा होने वाली आशंकाओं के प्रति सजग रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को यह पहचानने की जरूरत है कि बच्चों के व्यवहार में बदलाव किन कारणों से आ रहा है और कौन से कदम उनके मानसिक एवं सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं।
