सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी मर्डर व रेप केस में अदालत का बड़ा फैसला: मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत 3 को फांसी, रायपुर जेल होंगे शिफ्ट

सूरजपुर / रायपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित मां-बेटी दोहरे हत्याकांड एवं बलात्कार मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन मुख्य दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है, जबकि चौथे दोषी को आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा मिली है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले, अदालती फैसले, साक्ष्यों और मुख्य आरोपी से जुड़े घटनाक्रम का पूरा ब्योरा नीचे दिया गया है:
1. अदालत का मुख्य फैसला और सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला: अदालत ने नृशंस अपराध की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी कुलदीप साहू तथा उसके दो अन्य साथियों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई। मामले के चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा को मृत्यु तक जेल में रहने (आजीवन कारावास) की सजा दी गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाया गया फैसला: सुरक्षा कारणों से फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनाया गया।
सजा सुनते ही बदला आरोपी का तेवर: कोर्ट द्वारा फांसी की सजा का ऐलान सुनते ही मास्टरमाइंड कुलदीप साहू बेहद डरा-सहमा नजर आया। इससे पूर्व एक अन्य आपराधिक मामले में 10 वर्ष की सजा मिलने पर कोर्ट परिसर से बाहर निकलते वक्त वह मुस्कुराता दिखा था, लेकिन फांसी का फरमान सुनते ही उसके चेहरे की हवाइयां उड़ गईं।
2. रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट करने की तैयारी
जेल स्थानांतरण: वर्तमान में अम्बिकापुर केंद्रीय जेल में बंद मुख्य दोषी कुलदीप साहू और अन्य दोषियों को जल्द ही रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्थानांतरण का कारण: कानूनी और तकनीकी नियमों के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में फांसी (मृत्युदंड) की व्यवस्था केवल रायपुर सेंट्रल जेल में ही उपलब्ध है, जिसके कारण दोषियों को वहां शिफ्ट किया जा रहा है।
3. खौफनाक वारदात का ब्योरा
घटना की तारीख: यह दिल दहला देने वाली वारदात 13 अक्टूबर 2024 की देर रात सूरजपुर जिले में अंजाम दी गई थी।
पीड़ित: सूरजपुर थाने में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक (Head Constable) की पत्नी और उनकी 11 वर्षीया मासूम बेटी।
वारदात की नृशंसता: आरोपियों ने मां-बेटी की बेरहमी से हत्या करने से पहले उनके साथ अनाचार किया था। इसके बाद दोनों के शवों को उनके घर से लगभग 5 किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में फेंक दिया था।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा: फॉरेंसिक जांच एवं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, 11 साल की मासूम बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार और उसकी मां पर 33 से अधिक वार किए गए थे।
4. केस के निर्णायक साक्ष्य (Scientific Evidence)
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य दोषियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में बेहद निर्णायक साबित हुए:
DNA रिपोर्ट: डीएनए प्रोफाइलिंग जांच से मां और मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म की वैज्ञानिक पुष्टि हुई।
फिंगरप्रिंट्स एवं ब्लड सैंपल: घटनास्थल से बरामद फिंगरप्रिंट्स और आरोपियों के कपड़ों व हथियारों पर मिले पीड़ित मां-बेटी के खून के नमूनों की फॉरेंसिक लैब (FSL) रिपोर्ट ने अदालत में आरोपियों का जुर्म निसंदेह साबित किया।

