छत्तीसगढ़ के 17 अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा छापा: आयुष्मान कार्ड से फर्जी क्लेम और डमी पेशेंट का खुलासा, 2 अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े और मरीजों से अवैध वसूली के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। विभाग ने गुप्त रणनीति के तहत प्रदेश के 17 निजी अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान ICU में फर्जी तरीके से भर्ती दिखाए गए मरीज, लापता फाइलें और डमी पेशेंट्स से क्लेम उठाने जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर मेडिलाइफ सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन रद्द करने व एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि लोटस हॉस्पिटल एंड एडवांस यूरोलॉजी सेंटर को आयुष्मान योजना से डी-एम्पैनल कर दिया गया है।

52 अफसरों की 17 टीमों ने एक साथ बोला धावा

स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी अस्पताल डमी पेशेंट्स और फर्जी दस्तावेजों के जरिए आयुष्मान योजना से लाखों का क्लेम उठा रहे हैं। इसके बाद विभाग ने 52 अफसरों की 17 विशेष टीमें बनाईं। गोपनीयता बनाए रखने के लिए जांच अधिकारियों को सुबह 10 बजे ही मौके पर बताया गया कि उन्हें किस शहर के किस अस्पताल में जांच के लिए जाना है।

छापेमारी के दायरे में आए जिले:

  • रायपुर: 7 अस्पताल

  • बिलासपुर: 3 अस्पताल

  • दुर्ग: 2 अस्पताल

  • सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव एवं कोरबा: 1-1 अस्पताल

ICU में भर्ती थे मरीज, लेकिन मौके पर फाइलें ही गायब

जांच टीमों जब अस्पतालों में पहुंचीं तो हैरान करने वाले मामले सामने आए:

  • गायब रिकॉर्ड: कई अस्पतालों में ICU में भर्ती दिखाए गए मरीजों की बेड फाइलें गायब थीं। नियम के मुताबिक मरीज के पास रहने वाली फाइलों को उपलब्ध कराने में अस्पताल प्रबंधन को 15 से 20 मिनट का समय लगा।

  • अनावश्यक भर्ती: सामान्य सिरदर्द या हल्के दर्द की शिकायत लेकर आए मरीजों को भी आयुष्मान क्लेम भुनाने के लिए बेवजह भर्ती करके रखा गया था।

  • वरदान अस्पताल में संदिग्ध डिस्चार्ज: रायपुर के शंकर नगर स्थित वरदान अस्पताल में 28 सितंबर की सुबह अचानक 19 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया, जिनमें से 18 मरीज पड़ोसी राज्य ओडिशा के थे। जांच के दौरान अस्पताल में आयुष्मान योजना के केवल 7 मरीज ही पंजीकृत मिले।

मरीजों से अतिरिक्त पैसों की वसूली भी साबित

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन ने बताया कि जिन अस्पतालों के खिलाफ ज्यादा शिकायतें आई थीं, वहां औचक निरीक्षण किया गया है। लोटस अस्पताल में मरीजों से इलाज के नाम पर अतिरिक्त पैसे लेने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है और आने वाले दिनों में अनियमितता बरतने वाले अन्य निजी अस्पतालों पर भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।