टाटा संस में बड़ा घमासान: एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार पर छिड़ी जंग, नोएल टाटा ने बताया फैसला ‘गैरकानूनी’

मुंबई: देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) में बड़ा कॉर्पोरेट और गवर्नेस विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड बैठक के दौरान टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) को 5 साल का नया कार्यकाल देने के प्रस्ताव पर बोर्ड सदस्यों के बीच तीखी असहमति देखने को मिली है।
बोर्ड बैठक का घटनाक्रम और वोटिंग
कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव: टाटा संस के बोर्ड ने बहुमत के आधार पर एन. चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 के बाद अगले 5 वर्षों के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला लिया।
नोएल टाटा का विरोध: टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन और बोर्ड सदस्य नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। उन्होंने तर्क दिया कि चंद्रशेखरन स्वयं पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त कर चुके थे, जिसे स्वीकार किया जा चुका था।
टाटा ट्रस्ट्स का रुख और कानूनी पहलू
टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को नियमों के खिलाफ और ‘गैरकानूनी’ (Legal Nullity) करार दिया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के अनुसार, ऐसे फैसले के लिए ट्रस्ट द्वारा नामांकित सभी निदेशकों की सहमति आवश्यक होती है।
इसके अलावा, बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listing/IPO) करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया है, जिस पर भी मतभेद बरकरार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में शेयरधारकों की वार्षिक आम बैठक (AGM) या अदालत तक पहुंच सकता है।

