नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ की तबाही: ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्य लापता, सद्गुरु ने मांगी प्रभावित क्षेत्र में जाने की अनुमति

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच ईशा फाउंडेशन के कैलाश मानसरोवर यात्रा समूह के 80 सदस्य संपर्क से बाहर हैं। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने बताया कि लापता समूह में 77 तीर्थयात्री, तीन स्वयंसेवक और एक डॉक्टर शामिल हैं।

सद्गुरु के अनुसार, तीर्थयात्रियों के समूह में 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल हैं। यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र स्थित इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा था। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।

इमिग्रेशन सेंटर और आसपास का इलाका बाढ़ में बहा

सद्गुरु ने बताया कि यात्रा दल के सदस्य वापसी के दौरान इमिग्रेशन प्रक्रिया के लिए केंद्र पर मौजूद थे। कुछ ही समय बाद इलाके में अचानक बाढ़ आ गई। बाढ़ की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इमिग्रेशन भवन और आसपास के क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। संचार व्यवस्था ठप होने और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लापता लोगों के बारे में तत्काल जानकारी हासिल करना मुश्किल हो गया है।

ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया है कि प्रभावित समूह की जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय अधिकारियों और राहत एवं बचाव एजेंसियों के साथ संपर्क की कोशिश की जा रही है।

सद्गुरु ने प्रभावित क्षेत्र में जाने की मांगी अनुमति

सद्गुरु इस समय तिब्बत में हैं। उन्होंने चीनी अधिकारियों से ग्यिरोंग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति देने की अपील की है। उनका कहना है कि वह स्वयं एक छोटी टीम के साथ प्रभावित इलाके में जाकर स्थिति का जायजा लेना और जरूरत पड़ने पर खोज एवं बचाव कार्यों में सहयोग करना चाहते हैं। हालांकि, बाढ़ के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित हैं।

सद्गुरु ने आपदा की भयावहता पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है और अभी तक लापता सदस्यों की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

77 तीर्थयात्रियों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं

ईशा फाउंडेशन से जुड़े कैलाश मानसरोवर यात्रा कार्यक्रम में शामिल 77 तीर्थयात्रियों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रभावित समूह में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल थे। ईशा फाउंडेशन ने बताया था कि यात्रा के अन्य कई समूह सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं, जबकि प्रभावित समूह ग्यिरोंग में फंसा था।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर व्यापक तबाही

बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले और तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। संचार व्यवस्था बाधित होने से राहत एवं बचाव अभियान में भी कठिनाइयां सामने आ रही हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और विभिन्न एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं।

ईशा फाउंडेशन ने प्रभावित तीर्थयात्रियों के परिजनों के संपर्क में रहने और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी साझा करने की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल सभी की सुरक्षित वापसी की उम्मीद के बीच राहत और खोज अभियान पर नजर बनी हुई है।