अमेरिकी सीनेट में रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ बिल पास: भारत, चीन समेत 5 देश निशाने पर, निर्यात और पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा सीधा असर
वाशिंगटन:
अमेरिकी सीनेट ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ एक बेहद सख्त और कड़ा कदम उठाया है। सीनेट ने भारी बहुमत से एक ऐसा विधेयक (बिल) पारित किया है, जिसके लागू होने पर भारत और चीन सहित 5 देशों पर अमेरिकी बाजार में 100% तक का भारी आयात शुल्क (Tariff) लगाया जा सकता है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को तेल की बिक्री से होने वाली वित्तीय आय को रोकना है।
सीनेट में भारी बहुमत से पारित हुआ बिल
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वोटिंग का नतीजा: अमेरिकी सीनेट में इस बिल को 86-11 के भारी अंतर से पारित किया गया, जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही राजनीतिक दलों का मजबूत समर्थन मिला।
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निशाने पर कौन से 5 देश: इस बिल के दायरे में रूस से तेल आयात करने वाले पांच प्रमुख देश—भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
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अगली प्रक्रिया: सीनेट से पास होने के बाद अब इस बिल को अमेरिकी संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ (House of Representatives) में भेजा जाएगा। वहां से पारित होने के पश्चात जब अमेरिकी राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करेंगे, तब यह अंतिम रूप से कानून बन जाएगा।
बिल के अन्य कड़े प्रावधान
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रूसी उत्पादों पर 500% तक टैरिफ: इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वे अमेरिका आने वाले किसी भी रूसी सामान पर 5 वर्षों के लिए 500% तक का दंडात्मक टैरिफ लगा सकते हैं।
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ईरान प्रतिबंधों का विस्तार: 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ की अवधि को वर्ष 2031 तक के लिए बढ़ा दिया गया है, जिससे ईरान के साथ व्यापार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर भी प्रतिबंध जारी रहेंगे।
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यूरोपीय देशों को शर्तों के साथ छूट: उन यूरोपीय देशों को इस 100% टैरिफ से राहत दी गई है जो रूस से अपनी कुल खपत का 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता को तेजी से घटा रहे हैं।
भारत की स्थिति: रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल आयात
यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से लगातार रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है:
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रिकॉर्ड खरीदारी: बीते जून महीने में भारत ने रूस से 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जो भारत के कुल तेल आयात का 52.4% था (अर्थात भारत में आने वाले हर दूसरे बैरल से अधिक तेल रूस का था)।
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आयात में उछाल: मई की तुलना में जून के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में लगभग 39% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
यदि यह बिल कानून बनता है, तो भारत पर क्या होगा प्रभाव?
यदि यह बिल पूरी तरह कानून का रूप लेता है, तो भारत के सामने दो जटिल स्थितियां उत्पन्न होंगी:
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स्थिति 1: यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है:
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अमेरिका में भारतीय सामानों पर 100% टैरिफ लगने से भारत से अमेरिका जाने वाले सभी उत्पाद दोगुने महंगे हो जाएंगे।
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अमेरिकी खरीदार भारतीय सामानों के स्थान पर बांग्लादेश, वियतनाम या मेक्सिको जैसे अन्य देशों के उत्पादों को तरजीह देंगे।
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इससे भारत के टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग), जेम्स एवं ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर और केमिकल्स क्षेत्र के बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर्स रद्द हो सकते हैं।
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स्थिति 2: यदि भारत अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद करता है:
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भारत को मध्य-पूर्व (गल्फ देशों) या अन्य महंगे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ेगा।
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इससे देश में कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ेगा, जिसके सीधे परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और महंगाई दर में इजाफा होगा।
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