IIT दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह: पीएम मोदी ने ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का किया उद्घाटन, 3,000 से अधिक छात्रों को मिली डिग्री

नई दिल्ली:

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह (Convocation) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने देश की तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमताओं को नया आयाम देते हुए ‘परम प्रज्ञा’ (Param Pragya) सुपरकंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित किया तथा दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं से ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

AI आधारित ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन

  • रिमोट से लोकार्पण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT दिल्ली के सोनीपत (हरियाणा) स्थित एक्सटेंशन कैंपस में स्थापित ‘परम प्रज्ञा’ नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटर का रिमोट के माध्यम से उद्घाटन किया।

  • अनुसंधान को मिलेगी नई गति: यह अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर एआई, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, क्लाइमेट मॉडल और अत्याधुनिक शोध (Research) के क्षेत्र में देश के शोधकर्ताओं को नई शक्ति प्रदान करेगा।

  • सुपरकंप्यूटिंग मिशन में भारत की प्रगति: ‘नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (NSM) के तहत देश के अग्रणी संस्थानों (जैसे IISc, IITs, C-DAC) में अब तक कुल 37 सुपरकंप्यूटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं, जो वर्तमान में पूर्ण क्षमता के साथ कार्यरत हैं।

पीएम मोदी का संबोधन: “असली जिंदगी का सिलेबस तय नहीं होता”

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पास आउट हो रहे युवा इंजीनियरों और शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन किया:

  • विकसित भारत का रोडमैप: पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले 35 वर्षों में युवाओं द्वारा किया गया कार्य ही ‘विकसित भारत’ की सबसे मजबूत नींव साबित होगा।

  • समाधान केंद्रित दृष्टिकोण: उन्होंने छात्रों को केवल समस्याएं या सवाल उठाने के बजाय उनके व्यावहारिक और तकनीकी समाधान (Solutions) खोजने पर ध्यान केंद्रित करने की सीख दी।

  • व्यावहारिक जीवन की चुनौतियां: उन्होंने कहा कि IIT में पढ़ाई का पाठ्यक्रम (Syllabus) और परीक्षाओं की तारीखें तय होती हैं, लेकिन असली जिंदगी में सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। वहां वास्तविक समस्या को पहचानना और उसका हल निकालना खुद व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर करता है।

  • रोचक व हल्का-फुल्का अंदाज: छात्रों की उत्सुकता पर चुटकी लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन मुझे पता है कि आपके मन में इस समय क्या चल रहा होगा।”

3,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधि

समारोह में 3,000 से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें रिकॉर्ड 587 पीएचडी (Ph.D.) स्कॉलर्स भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री ने विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।