रायपुर : जरूरतमंदों के लिए संजीवनी बना छत्तीसगढ़ का समाज कल्याण मॉडल, सामाजिक सुरक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा राज्य
रायपुर, 6 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में समाज कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल करते हुए सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिकों की सहायता, महिलाओं के कल्याण और नशामुक्ति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य सरकार का दावा है कि पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था और जन-केंद्रित योजनाओं के माध्यम से लाखों जरूरतमंद नागरिकों तक सीधे लाभ पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए संचालित योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया गया है। दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच विभिन्न योजनाओं में लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
21 लाख से अधिक लोगों को मिल रहा सामाजिक सुरक्षा का लाभ
राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 7.56 लाख हो गई है। वहीं वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजन, सामाजिक सुरक्षा एवं सुखद सहारा जैसी योजनाओं को मिलाकर 21.73 लाख से अधिक नागरिक नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि लगभग 96 प्रतिशत भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से किया जा रहा है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी जैसी डिजिटल प्रक्रियाओं ने योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
दिव्यांगजनों के लिए संचालित योजनाओं में भी उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। यूडीआईडी (UDID) धारकों की संख्या बढ़कर 2.77 लाख हो गई है।
कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के लाभार्थियों की संख्या 1,161 से बढ़कर 17,038 तक पहुंच गई है। वहीं सामर्थ्य विकास योजना के माध्यम से कौशल विकास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का भी विस्तार किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 14 हजार से अधिक हो गई है। साथ ही विशेष विद्यालयों, फिजिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर और विशेष चिकित्सा सेवाओं का भी विस्तार किया गया है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत सहायता तंत्र
राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम, आश्रय गृह और देखभाल संस्थाओं की क्षमता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही सियान हेल्पलाइन (155326) को प्रभावी सहायता मंच के रूप में विकसित किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉलों की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख तक पहुंच गई है, जो वरिष्ठ नागरिकों के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
नशामुक्ति अभियान को मिली नई गति
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित भारत माता वाहिनी योजना के अंतर्गत नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़कर 29 हो गई है। इन केंद्रों के माध्यम से लाभान्वित लोगों की संख्या 1,967 से बढ़कर 5,220 तक पहुंच गई है।
इन केंद्रों में उपचार के साथ-साथ परामर्श, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
‘सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान’ पर जोर
राज्य सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और एक्सेसिबल इंडिया अभियान की भावना के अनुरूप ‘सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान’ शुरू किया है। इसके तहत सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक भवनों और शैक्षणिक संस्थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जा रहा है।
सरकार ने दिव्यांगजनों के अधिकारों की प्रभावी निगरानी के लिए आयुक्त राज्य के नए पद को भी स्वीकृति प्रदान की है।
समाज कल्याण बजट में बढ़ोतरी
सरकार ने समाज कल्याण से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष विद्यालयों के उन्नयन, पुनर्वास केंद्रों के विस्तार, दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से ऋण वितरण और नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए भी निवेश बढ़ाया है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में समाज कल्याण विभाग का बजट 1,512 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2025-26 में 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
डिजिटल और मानवीय दृष्टिकोण का समन्वय
राज्य सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ का समाज कल्याण मॉडल डिजिटल प्रशासन और मानवीय संवेदनशीलता के संतुलित समन्वय पर आधारित है। डीबीटी, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी, डिजिटल डेटा प्रबंधन और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं के साथ पुनर्वास, परामर्श, आश्रय और सामुदायिक सहयोग को भी समान महत्व दिया गया है।
सरकार का दावा है कि पिछले ढाई वर्षों की उपलब्धियां सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, महिलाओं की सुरक्षा और नशामुक्त समाज की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इसी के साथ छत्तीसगढ़ का समाज कल्याण मॉडल सामाजिक न्याय, तकनीकी नवाचार और मानवीय गरिमा के समन्वित विकास का उदाहरण बनकर उभरा है।
