छत्तीसगढ़: सुशासन शिविर में भारी हंगामा, विधायक के सामने भिड़े अफसर और भाजपा नेता; ₹60,000 रिश्वत लेते बाबू गिरफ्तार
दुर्ग/कोरबा|
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार शिविर’ से दो बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। एक तरफ जहां दुर्ग जिले में विधायक की मौजूदगी में एक प्रशासनिक अधिकारी और भाजपा नेता के बीच तीखी बहस हो गई, वहीं दूसरी तरफ कोरबा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सरकारी बाबू को ₹60,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा गया।
1. दुर्ग में हाई-वोल्टेज ड्रामा: विधायक के सामने जनपद CEO और भाजपा नेता में बहस
दुर्ग जिले में आयोजित सुशासन तिहार शिविर उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया, जब स्थानीय विधायक की मौजूदगी में अधिकारियों और नेताओं के बीच विवाद बढ़ गया।
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विवाद की वजह: शिविर में काम को लेकर भाजपा नेता और जनपद सीईओ (CEO) के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अधिकारी अपना आपा खो बैठे।
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अधिकारी की दोटूक: तीखी बहस के दौरान नाराज अधिकारी ने भाजपा नेता से तल्ख लहजे में कहा, “जो करना है कर लो।” विधायक के सामने हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2. कोरबा में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई, बाबू गिरफ्तार
सुशासन के दावों के बीच कोरबा जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। यहां एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने जाल बिछाकर एक भ्रष्ट कर्मचारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
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₹60,000 की घूस: एक क्लर्क (बाबू) को काम के एवज में ₹60,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
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कार्रवाई: पीड़ित की शिकायत पर एसीबी ने त्वरित एक्शन लिया और जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, आरोपी बाबू को धर दबोचा। पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
सुशासन पर सवाल: एक ही दिन में सामने आए इन दोनों मामलों ने राज्य में जारी ‘सुशासन शिविरों’ की जमीनी हकीकत और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
