अमेरिका-ईरान युद्ध संकट: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल टाला सैन्य हमला, खाड़ी देशों की अपील पर बातचीत शुरू
वाशिंगटन/तेहरान: वैश्विक पटल से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बादलों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर होने वाले एक बड़े सैन्य हमले को फिलहाल स्थगित (Postpone) कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले से दुनिया ने राहत की सांस ली है, हालांकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव अभी भी चरम पर है।
खाड़ी देशों के अनुरोध पर लिया गया फैसला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के अनुसार, यह बड़ा फैसला सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं के विशेष अनुरोध पर लिया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस समय युद्ध को टालने और इस संकट को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे “गंभीर और उच्च स्तरीय बातचीत” चल रही है, जिसके कारण सैन्य कार्रवाई को अभी रोका गया है।
ईरान का प्रस्ताव: पाकिस्तान बना मध्यस्थ
युद्ध के टलने की एक बड़ी वजह ईरान का कूटनीतिक कदम भी माना जा रहा है। ईरान ने सीधे अमेरिका से बात न करते हुए पाकिस्तान के जरिए वाशिंगटन को एक 14-सूत्रीय राजनयिक प्रस्ताव (14-Point Diplomatic Proposal) भेजा है। इस प्रस्ताव में तनाव कम करने और दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दों को सुलझाने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिस पर अमेरिकी प्रशासन विचार कर रहा है।
तनाव बरकरार: जलमार्गों पर बढ़ी निगरानी भले ही हमला टल गया हो, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी नाजुक है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (Persian Gulf Strait Authority) का गठन कर दिया है। इसके तहत ईरान ने इस पूरे समुद्री रास्ते पर अपनी सैन्य निगरानी काफी बढ़ा दी है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने जताई गहरी चिंता
ईरान द्वारा ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ बनाकर जलमार्ग पर नियंत्रण बढ़ाने के इस कदम का वैश्विक स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। यूएन का मानना है कि इस महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग पर किसी भी तरह की सैन्य घेराबंदी या एकतरफा निगरानी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है और मामूली सी चूक भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है।
फिलहाल, दुनिया की नजरें अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच चल रही इस गुप्त वार्ता और ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर टिकी हुई हैं।
