पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा: स्पेस से लेकर समंदर तक हुए कई ऐतिहासिक समझौते, यूक्रेन और मिडल ईस्ट संकट पर भी चर्चा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक विदेशी दौरे के तहत नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे। यहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर (Jonas Gahr Støre) के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Meeting) की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक को भारत और नॉर्वे के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ का ऐतिहासिक एलान

इस द्विपक्षीय बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण दोनों देशों के बीच एक नई ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ (Green Strategic Partnership) की घोषणा रही। पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

अंतरिक्ष से लेकर समंदर (Blue Economy) तक हुए कई समझौते

इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत और नॉर्वे ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • क्लीन एनर्जी (Clean Energy): हरित ऊर्जा और रिन्यूएबल सोर्सेज पर मिलकर काम करने की सहमति।

  • ब्लू इकॉनमी और मैरीटाइम रिसर्च (Blue Economy & Maritime Research): समुद्री संसाधनों के सही इस्तेमाल और समुद्री रिसर्च के लिए तकनीकी साझाकरण।

  • अंतरिक्ष (Space Technological Cooperation): स्पेस सेक्टर में भारत और नॉर्वे के बीच नई सैटेलाइट और अंतरिक्ष तकनीकों पर सहयोग।

  • डिजिटल टेक्नोलॉजी (Digital Technology): दोनों देशों के बीच आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना।

वैश्विक मुद्दों पर भी हुई गंभीर चर्चा

सकारात्मक द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ दोनों प्रधानमंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक संकटों पर भी अपनी चिंताएं साझा कीं। बैठक में विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध और वेस्ट एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष पर गंभीर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति स्थापित करने के भारत के रुख को एक बार फिर दोहराया।

इस ऐतिहासिक दौरे से न केवल भारत और नॉर्वे के व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भी दोनों देशों की साझेदारी को एक नई दिशा मिलेगी।

You may have missed