झीरम घाटी हमले में 10 आरोपी दोषी करार, NIA कोर्ट के फैसले पर फिर उठे जांच के सवाल

जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में शनिवार को जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इस प्रकरण में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, लेकिन एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद शेष 10 आरोपियों के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ बड़ी संख्या में दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। मामले में 10 अगस्त को अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होने की बात कही, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा।

25 मई 2013 को हुआ था खूनी हमला

NIA के रिकॉर्ड के अनुसार 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। हमले में 38 लोग घायल हुए थे।

दोषियों के वकील बोले- हाईकोर्ट जाएंगे

10 आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है और इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

कांग्रेस ने उठाए जांच पर सवाल

अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच को लेकर सवाल खड़े किए। पार्टी का आरोप है कि मामले में छोटे स्तर के नक्सलियों को आरोपी बनाया गया, जबकि हमले के पीछे कथित तौर पर साजिश रचने वाले बड़े नक्सली नेताओं तक जांच नहीं पहुंच सकी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे हमले के वास्तविक षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की पूरी तस्वीर सामने नहीं करते।

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि बस्तर की जनता इस घटना को राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग के तौर पर देखती है। उनका आरोप है कि सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस नेताओं और जवानों की हत्या कराई गई। बैज ने कहा कि हमले की योजना बनाने वाले बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

तूलिका कर्मा बोलीं- न्याय के नाम पर हुई खानापूर्ति

महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने भी NIA की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय भी प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और वर्तमान में भी भाजपा सत्ता में है। उनका आरोप है कि घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों से पर्याप्त पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय की अपेक्षा थी, लेकिन जांच और कार्रवाई से परिवारों को पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिली।

कांग्रेस महामंत्री ने भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की रैली और सुकमा में आयोजित सभा के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई थी। उन्होंने कहा कि घटना के शुरुआती दौर से ही कई सवाल उठते रहे हैं। पार्टी अब कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगी।

भूपेश बघेल पहले भी जांच पर उठा चुके हैं सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर पहले सवाल उठाए थे। कांकेर में उन्होंने कहा था कि घटना के पीछे मौजूद कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में गंभीर और ठोस प्रयास नहीं किए गए। उनका कहना था कि जब जांच पूरी तरह सही दिशा में नहीं हुई, तो अदालत का फैसला भी उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही आएगा।

बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मध्य क्षेत्र की बैठक में झीरम मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी। उनका तर्क था कि यदि केंद्र सरकार जांच आगे नहीं बढ़ा सकती तो राज्य को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सरकार ने जब मामले की जांच के लिए SIT गठित की, तो NIA ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, जहां फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया। हालांकि, तब तक उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका था।