रेलवे स्टेशनों के पानी में बैक्टीरिया: CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, बिलासपुर जोन के 512 स्टेशनों के पानी में मिला ई-कोलाई

बिलासपुर/नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर जोन के 512 रेलवे स्टेशनों के पेयजल नमूनों की जांच का विवरण सामने आया है, जिसमें पानी में हानिकारक ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया और सीवेज से संदूषण (Sewage Contamination) के लक्षण मिले हैं।

512 स्टेशनों के सैंपल की जांच में खुला राज

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर रेल मंडल और उसके अंतर्गत आने वाले स्टेशनों से पेयजल के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे। जांच के नतीजों ने रेल यात्रियों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ की पोल खोल दी:

  • ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी: पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जो आमतौर पर मानव या पशु अपशिष्ट (मल-मूत्र) के संपर्क से पानी में फैलता है।

  • सीवेज का मिलावट: जांच रिपोर्ट में इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवेज का पानी मिल रहा है, जिससे यात्रियों में पीलिया, हैजा, और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

यात्री सुविधाओं और रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल

इस कैग रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद रेलवे के स्वच्छता और यात्री सुरक्षा के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। प्रतिदिन लाखों यात्री इन स्टेशनों से होकर गुजरते हैं और रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले वाटर वेंडिंग मशीनों और नलों के पानी का सेवन करते हैं।

यात्री संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों ने इस लापरवाही पर कड़ा एतराज जताया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: “ई-कोलाई युक्त पानी पीना बेहद खतरनाक है। इससे गंभीर गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड और आंतों में संक्रमण हो सकता है। रेलवे को तुरंत सभी स्टेशनों पर वाटर ट्रीटमेंट और पाइपलाइनों की ओवरहालिंग करनी चाहिए।”

रेलवे से तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की मांग

कैग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि रेलवे स्टेशनों पर नियमित रूप से वाटर क्वालिटी टेस्टिंग की जाए, पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को बदला जाए और वाटर प्यूरिफिकेशन प्लांटों का प्रॉपर मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए।