नवा रायपुर नकटी कांड: विस्थापितों के बच्चों की पढ़ाई के लिए आगे आया बाल संरक्षण आयोग, बेघर बच्चों की शिक्षा के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश

रायपुर, 02 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर के समीप नवा रायपुर इलाके में भूमि अधिग्रहण और तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद विस्थापित हुए नकटी गांव के परिवारों का आंदोलन और प्रदर्शन लगातार जारी है। बारिश के इस मौसम में सिर से छत छिन जाने के बाद इन परिवारों के सामने रहने और खाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे विवाद के बीच, बेघर हुए मासूम बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा पर मंडरा रहे संकट को देखते हुए बाल संरक्षण आयोग (Child Protection Commission) ने एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है।

आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए स्थानीय प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग को विस्थापित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं।


बारिश में आशियाना उजड़ने से बच्चों की पढ़ाई ठप

नकटी गांव में हुई कार्रवाई के बाद से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। उनके स्कूल बैग, किताबें और कॉपियां मलबे में दब गईं या विस्थापन की आपाधापी में खराब हो गईं। इस गंभीर मानवीय संकट पर बाल संरक्षण आयोग ने चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन के सामने निम्नलिखित बिंदु रखे हैं:

  • तत्काल अस्थाई व्यवस्था: बेघर हुए बच्चों को तुरंत पास के सरकारी स्कूलों या अस्थाई केंद्रों में दाखिला और बैठने की व्यवस्था दी जाए।

  • निःशुल्क पाठ्य सामग्री: जिन बच्चों की किताबें और कॉपियां नष्ट हो चुकी हैं, उन्हें शिक्षा विभाग की ओर से तुरंत नए बुक्स और स्टेशनरी किट उपलब्ध कराए जाएं।

  • मानसिक संबल की जरूरत: बेघर होने के कारण बच्चे गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, इसके लिए प्रभावित इलाकों में बाल परामर्शदाताओं (Child Counselors) की मदद ली जाए।


नकटी विस्थापन मामला: वर्तमान स्थिति (Table)

इस पूरे मामले में एक तरफ ग्रामीणों का आक्रोश है, तो दूसरी तरफ बच्चों के हक के लिए आयोग की दखल के बाद प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है:

प्रभावित वर्ग / पक्ष वर्तमान स्थिति आगामी प्रशासनिक कदम (आयोग के निर्देशानुसार)
नकटी के विस्थापित परिवार खुले आसमान और टेंट के नीचे प्रदर्शन जारी। पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा।
स्कूली बच्चे किताबें गुम होने और आशियाना न होने से पढ़ाई ठप। तत्काल वैकल्पिक कक्षाओं और निःशुल्क किताबों की व्यवस्था।
प्रशासनिक अमला कानून व्यवस्था बनाए रखने में मुस्तैद। शिक्षा और बाल विकास विभाग के साथ समन्वय बैठक।

“किसी भी विकास या प्रशासनिक कार्रवाई की वेदी पर बच्चों का भविष्य और उनकी शिक्षा की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती। शिक्षा पाना हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। प्रशासन को 24 घंटे के भीतर प्रभावित बच्चों की स्कूलिंग बहाल करने और उन्हें आवश्यक सामग्री देने के निर्देश दिए गए हैं।”

बाल संरक्षण आयोग सदस्य / अधिकारी

आयोग के इस कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की टीमें नकटी गांव के विस्थापित शिविरों का दौरा करने की तैयारी में हैं, ताकि प्रभावित बच्चों का सर्वे कर उन्हें तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।