विकसित छत्तीसगढ़: ₹51 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं से देश का नया लॉजिस्टिक्स हब बन रहा प्रदेश, 24 गुना बढ़ा रेलवे बजट

रायपुर: छत्तीसगढ़ में रेलवे का विकास अब केवल नई पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की औद्योगिक प्रगति, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य की ‘डबल इंजन सरकार’ के समन्वित प्रयासों से पिछले ढाई वर्षों में रेलवे अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में ₹51,000 करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जो राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रेलवे निवेश है।

रेलवे बजट में 24 गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाही आंकड़े दे रहे हैं। वर्ष 2014 से पहले जहां छत्तीसगढ़ को रेल परियोजनाओं के लिए औसतन केवल ₹300 करोड़ का वार्षिक बजट मिलता था, वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह बढ़कर ₹7,470 करोड़ पहुंच गया है। एक दशक के भीतर रेलवे बजट में यह लगभग 24 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा:

“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास को अभूतपूर्व गति दी है। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की पहल पर जिस तेजी से नई रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, उसने प्रदेश के विकास की दिशा ही बदल दी है।”


प्रमुख रेल परियोजनाएं जो बदल रही हैं तस्वीर

छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क को 1,100 रूट किलोमीटर से बढ़ाकर 2,200 रूट किलोमीटर से अधिक करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। राज्य में कई बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रगति पर हैं:

  • खरसिया-नवा रायपुर-परमालकसा रेल कॉरिडोर: ₹8,741 करोड़ की लागत से बनने वाला यह 278 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर कोलकाता-मुंबई मार्ग का प्रभावी विकल्प बनेगा। इससे प्रदेश की लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल करीब ₹2,520 करोड़ की कमी आएगी।

  • बस्तर में रावघाट रेल परियोजना: दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक यात्री ट्रेन शुरू होने के बाद अब तुमापाल से कोसरोण्डा और रावघाट तक का काम अंतिम चरण में है। इसके पूरा होने पर रावघाट की खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से जुड़ जाएंगी।

  • जशपुर को पहली बार मिलेगी रेल कनेक्टिविटी: धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना के माध्यम से जशपुर जिला पहली बार देश के रेलवे मानचित्र पर आने के लिए तैयार है।

  • चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन: ₹755 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से SECL और MCL की खदानों से कोयला परिवहन आसान होगा, जिससे देश के पावर प्लांट्स को निर्बाध बिजली सप्लाई मिलेगी।

  • रायपुर में नई रेल सुविधाएं: रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव (इलेक्ट्रिक लोको शेड) के लिए हाल ही में ₹175 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गई है।


अमृत भारत योजना: 32 स्टेशनों का कायाकल्प

यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का ₹1,680 करोड़ की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है। इसके साथ ही वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस और मेमू (MEMU) सेवाओं के विस्तार से आम यात्रियों का सफर बेहद आधुनिक और सुगम हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया है कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक सुदृढ़ हो रहा यह रेल नेटवर्क ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प के अनुरूप ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगा।