रायपुर एयरपोर्ट मेरी जमीन पर बना है: 10वीं पास किसान का ₹3500 करोड़ का दावा, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर के रहने वाले एक 10वीं पास किसान ने दावा किया है कि स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Swami Vivekananda International Airport) की मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग और उसके सामने बना खूबसूरत गार्डन उनके पूर्वजों की जमीन पर खड़ा है। इस दावे के साथ किसान ने सुप्रीम कोर्ट में ₹3500 करोड़ का केस दायर किया है।
क्या है पूरा मामला?
रायपुर के रहने वाले 53 वर्षीय किसान अश्विनी बांधे का दावा है कि एयरपोर्ट परिसर के अंतर्गत आने वाली 30 एकड़ 18 डिस्मिल जमीन उनके पूर्वजों की है। उनके पास इस जमीन से जुड़े पुख्ता दस्तावेज और खसरा रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनमें आज भी उनके पूर्वजों के नाम दर्ज हैं।
मुख्य बिंदु और किसान का दावा:
-
पूर्वजों की जमीन: किसान अश्विनी बांधे के अनुसार, जिस जमीन पर आज रोजाना हजारों यात्री उड़ान भरते हैं, वह कानूनी तौर पर उनकी पुश्तैनी संपत्ति है।
-
सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई: अपनी जमीन का हक पाने के लिए किसान ने देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है और मुआवजे व हर्जाने के तौर पर साढ़े 3 हजार करोड़ रुपये की मांग की है।
-
दस्तावेजों का हवाला: किसान का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों में हेरफेर की गई है, लेकिन उनके पास मौजूद पुराने कागजात उनके दावों को पूरी तरह सच साबित करते हैं।
“टर्मिनल बिल्डिंग और गार्डन जहां बने हैं, वह हमारे पूर्वजों की जमीन है। हम अपने हक की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे।”
— अश्विनी बांधे (दावा करने वाले किसान)
प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी में खलबली
इतनी बड़ी रकम के दावे और देश की सर्वोच्च अदालत में मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक गलियारों और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) में हड़कंप मच गया है। कानूनी विशेषज्ञ अब इस मामले के सभी पुराने लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुट गए हैं।
यह मामला आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेता है और सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या फैसला सुनाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
