MP BJP का मास्टरस्ट्रोक: निगम-मंडलों में न मंत्री का दर्जा मिलेगा, न अपना गृह जिला; लागू हुआ ‘नो होम टर्फ’ फॉर्मूला

भोपाल: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने तथा जमीनी स्तर पर मजबूती लाने के लिए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के निगम, मंडलों और प्राधिकरणों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर पार्टी ने नई गाइडलाइन तय कर दी है। अब इन पदों पर बैठने वाले नेताओं को न तो कोई VIP ट्रीटमेंट मिलेगा और न ही वे अपने गृह जिले (Home District) में काम कर सकेंगे।

पार्टी के इस नए फॉर्मूले को ‘नो होम टर्फ’ (No Home Turf) नाम दिया गया है, जिसका सीधा मकसद स्थानीय गुटबाजी को जड़ से खत्म करना है।

यहाँ जानिए मध्य प्रदेश बीजेपी के इस बड़े फैसले की 4 मुख्य बातें:

1. खत्म हुआ VIP प्रोटोकॉल और मंत्री का दर्जा अब तक निगम, मंडल और प्राधिकरणों में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बनने वाले नेताओं को अक्सर राज्य मंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया जाता था, जिसके साथ लाल बत्ती और भारी-भरकम सरकारी अमला चलता था। लेकिन अब पार्टी ने इस VIP कल्चर पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि ये पद केवल जनता के बीच काम करने के लिए दिए जाएंगे, सरकारी रसूख या शानौ-शौकत दिखाने के लिए नहीं।

2. ‘नो होम टर्फ’ फॉर्मूला (No Home Turf Formula) बीजेपी ने आपसी टकराव और स्थानीय गुटबाजी (Factionalism) को रोकने के लिए यह सख्त नियम बनाया है। अब किसी भी नेता को उसके खुद के गृह जिले या उसके प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्र में कोई पद या जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, नेताओं को उनके घर से दूर दूसरे जिलों की जिम्मेदारी सौंपकर काम पर लगाया जाएगा।

3. कमजोर और हारी हुई सीटों पर रहेगा मुख्य फोकस इन नियुक्तियों के पीछे पार्टी का एक बड़ा चुनावी लक्ष्य भी छिपा है। जो नेता निगम या मंडलों में जिम्मेदारी संभालेंगे, उन्हें विशेष रूप से उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहाँ पिछले चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था या जहाँ संगठन अभी भी कमजोर स्थिति में है। नेताओं की असली परीक्षा इन्हीं इलाकों में पार्टी का जनाधार बढ़ाने में होगी।

4. पद के साथ देना होगा ‘रिजल्ट’ संगठन ने अपने सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को कड़ा संदेश दिया है कि अब केवल पद लेकर आराम करने का समय खत्म हो चुका है। निगम और मंडलों के पदों को अब प्रतिष्ठा का प्रतीक (Status Symbol) नहीं माना जाएगा। नेताओं को ग्राउंड पर उतरकर पसीना बहाना होगा और हर हाल में पार्टी को मजबूत कर रिजल्ट देने होंगे।

क्या होगा इसका असर? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश बीजेपी का यह कदम कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा भरेगा। इससे उन नेताओं पर लगाम लगेगी जो केवल पद हासिल करके अपने ही क्षेत्र में राजनीति करते थे। अब नेताओं को अपनी क्षमता साबित करने के लिए अपने ‘कम्फर्ट जोन’ से बाहर निकलना ही पड़ेगा।

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