जूस की दुकान से महादेव सट्टा सिंडिकेट तक: सौरभ चंद्राकर की चौंकाने वाली कहानी, 12 हजार की नौकरी से करोड़ों के साम्राज्य तक का सफ

रायपुर। कभी भिलाई में कपड़े की दुकान पर नौकरी करने और जूस का कारोबार चलाने वाला सौरभ चंद्राकर आज देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में से एक, महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप केस का प्रमुख आरोपी है। करीब 12 से 14 हजार रुपये मासिक वेतन से अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत करने वाले सौरभ पर हजारों करोड़ रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं। सोमवार को उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की खबर के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

सौरभ चंद्राकर की कहानी केवल एक व्यक्ति के आर्थिक उत्थान की नहीं, बल्कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के उस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी है, जिसने छत्तीसगढ़ से लेकर विदेशों तक अपनी जड़ें फैलाने का आरोप झेला है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच, करोड़ों की संपत्तियों की कार्रवाई, दुबई में भव्य शादी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।

12 हजार रुपये की नौकरी से शुरू हुआ सफर

सौरभ चंद्राकर भिलाई के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता भिलाई नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। शुरुआती जीवन सामान्य परिस्थितियों में बीता। सौरभ ने 12वीं तक पढ़ाई की और करीब 17 वर्ष की उम्र में काम करना शुरू कर दिया। वर्ष 2014-15 के दौरान वह भिलाई के आकाश गंगा क्षेत्र में कपड़े की दुकानों में काम करता था, जहां उसे लगभग 12 से 14 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था।

इसी दौरान क्रिकेट पर सट्टा लगाने की उसकी आदत बढ़ी। बताया जाता है कि इसी क्रम में उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई, जो पहले से सट्टेबाजी के कारोबार से जुड़ा था। वर्ष 2018 के आसपास दोनों के बीच साझेदारी शुरू हुई। इसी दौरान सौरभ ने भिलाई के नेहरू नगर में ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से एक रेस्टोरेंट भी संचालित किया।

दुबई से खड़ा किया गया ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क

वर्ष 2019 में सौरभ चंद्राकर दुबई पहुंचा। जांच एजेंसियों के अनुसार, वहां उसने रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक के नाम से सट्टेबाजी का नेटवर्क विकसित किया। धीरे-धीरे इस नेटवर्क का विस्तार विभिन्न राज्यों और विदेशों तक होने लगा।

इस कथित नेटवर्क के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, पोकर, तीन पत्ती और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाए जाने की बात जांच में सामने आई। नेटवर्क में पैनल ऑपरेटर, एजेंट और सब-एजेंट की कई स्तरों वाली व्यवस्था होने का आरोप है। ग्राहकों को एजेंटों के माध्यम से आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाते थे।

दुबई में 200 करोड़ की शादी ने खींचा देश का ध्यान

सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में दुबई में हुई शादी इस मामले का सबसे चर्चित पहलू बन गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस भव्य आयोजन पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मेहमानों को लाने के लिए निजी विमानों का इस्तेमाल किया गया। लग्जरी होटल, भव्य सजावट और बड़े स्तर पर मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस समारोह में बॉलीवुड से जुड़े कई कलाकारों और गायकों के शामिल होने तथा प्रस्तुति देने की खबरें सामने आई थीं। इनमें नेहा कक्कड़, आतिफ असलम, राहत फतेह अली खान, टाइगर श्रॉफ, भाग्यश्री और अन्य चर्चित नाम शामिल बताए गए। शादी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आयोजन के खर्च और उसके स्रोत को लेकर सवाल उठने लगे।

विदेशी नागरिकता और गिरफ्तारी से बचने के आरोप

जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज होने के बाद सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की विदेशी नागरिकता का मामला भी सामने आया। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, दोनों ने प्रशांत महासागर के देश वानुआतु की नागरिकता प्राप्त की थी। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि विदेशी पासपोर्ट का इस्तेमाल भारतीय कानून और संभावित प्रत्यर्पण की कार्रवाई से बचने के लिए किया जा सकता है।

इस मामले में विदेशी यात्रा दस्तावेजों और पासपोर्ट को लेकर भी जांच की गई। सौरभ की विदेशों में गतिविधियों और उसके ठिकानों का पता लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियां सक्रिय रहीं।

508 करोड़ रुपये के दावे से छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल

महादेव ऐप मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी बड़ा विवाद बना। प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 508 करोड़ रुपये तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचाए जाने के कथित दावे का उल्लेख किया था। इस दावे में प्रमोटर शुभम सोनी और असीम दास के बयानों का हवाला दिया गया।

तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया था। इस मामले में सामने आए आरोपों और बयानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई। हालांकि, आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता और मामले की कानूनी प्रक्रिया तथा जांच को अलग-अलग समझना जरूरी है।

हवाला नेटवर्क और करोड़ों की संपत्तियों पर ED की कार्रवाई

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अवैध वित्तीय लेन-देन के पहलुओं की जांच की। जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को हवाला और अन्य माध्यमों से इधर-उधर किया जाता था। इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई।

जांच के दौरान कई शहरों में छापेमारी और गिरफ्तारियां भी हुईं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कथित अवैध कमाई से लग्जरी गाड़ियां, बंगले और विदेशों में महंगी संपत्तियां खरीदी गईं।

दुबई में शिव महापुराण कथा का आयोजन भी चर्चा में

दिसंबर 2024 में दुबई के ली मेरिडियन होटल एंड कॉन्फ्रेंस सेंटर में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन हुआ था। बताया गया कि 9 से 11 दिसंबर तक चले इस धार्मिक कार्यक्रम में सौरभ चंद्राकर और उसका सहयोगी रवि उप्पल भी मौजूद थे। आयोजन के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह कार्यक्रम भी चर्चा में आ गया। इस आयोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हुई, हालांकि किसी धार्मिक कार्यक्रम में मौजूदगी अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है।

1700 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई

मार्च 2026 में ED ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर और उसके नेटवर्क से जुड़ी करीब 1700 करोड़ रुपये की 20 अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की जानकारी दी थी। इनमें दुबई की 18 और नई दिल्ली की दो संपत्तियां शामिल बताई गईं।

दुबई में बुर्ज खलीफा के अपार्टमेंट, दुबई हिल्स एस्टेट के लग्जरी विला और अपार्टमेंट, बिजनेस बे तथा एसएलएस होटल एंड रेजिडेंसेज से जुड़ी संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया। ED के अनुसार, इन संपत्तियों को कथित अवैध सट्टेबाजी की कमाई से खरीदा गया था। एजेंसी ने इस पूरे मामले में अब तक 4,336 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच, सीज या फ्रीज किए जाने की जानकारी दी है।

अब रायपुर की अदालत में पेशी पर नजर

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में शामिल हो चुका है। भिलाई से शुरू हुआ सौरभ चंद्राकर का सफर, दुबई में कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार, करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन और विदेशी संपत्तियों पर कार्रवाई इस प्रकरण को लगातार सुर्खियों में बनाए हुए है।

अब रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में उसकी पेशी के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी निगाहें रहेंगी। इस मामले में अंतिम सच्चाई अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक फैसले से ही तय होगी।

राजनाथ सिंह ने नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित से की मुलाकात, सफल कार्यकाल की दी शुभकामनाएं 29वें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ बने आशुतोष दीक्षित, 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह; वायुसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर रहेगा विशेष जोर नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय वायुसेना के नवनियुक्त प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित से मुलाकात की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने उन्हें नई जिम्मेदारी संभालने पर बधाई देते हुए उनके सफल और शानदार कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित एक उत्कृष्ट वायु योद्धा हैं और अपने प्रभावशाली नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना नई ऊंचाइयों को हासिल करेगी। 29वें वायुसेना प्रमुख के रूप में संभाली जिम्मेदारी एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने शनिवार को भारतीय वायुसेना के 29वें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह का स्थान लिया, जो भारतीय वायुसेना में 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र आशुतोष दीक्षित 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। करीब चार दशकों के सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल गतिविधियों, फ्लाइट टेस्टिंग, क्षमता विकास और संयुक्त सैन्य अभियानों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। 3,300 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव एयर चीफ मार्शल दीक्षित एक अनुभवी फाइटर पायलट, क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं। उन्हें मिराज-2000, मिग विमानों के विभिन्न संस्करणों, जगुआर और परिवहन विमानों सहित कई तरह के विमानों को उड़ाने का 3,300 घंटे से अधिक का अनुभव है। भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जगुआर और मिग-27 विमानों के अपग्रेड कार्यक्रमों के साथ स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA Mk-I तेजस की प्रारंभिक और अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस प्रक्रियाओं में उनकी अहम भूमिका रही है। कई महत्वपूर्ण सैन्य पदों पर दे चुके हैं सेवाएं अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान आशुतोष दीक्षित ने मिराज-2000 स्क्वाड्रन, पश्चिमी क्षेत्र के एक फॉरवर्ड बेस सपोर्ट यूनिट और वायुसेना स्टेशन बीदर की कमान संभाली है। इसके अलावा वे सदर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर, साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर, डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वे वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। उन्हें वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ‘VAYU’ विजन से तय होंगी वायुसेना की प्राथमिकताएं नए वायुसेना प्रमुख ने कार्यभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताओं को ‘VAYU’ विजन के माध्यम से स्पष्ट किया। इसमें सतर्कता, आत्मनिर्भरता, युक्ति और एकजुट प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया है। उनके अनुसार, बदलती तकनीक और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना को लगातार अपनी क्षमताओं का विकास करना होगा। वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को निर्धारित स्तर तक पहुंचाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। जवानों और उनके परिवारों का कल्याण भी प्राथमिकता एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने वायुसेना के अधिकारियों, एयर वॉरियर्स, अग्निवीरवायु कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारतीय वायुसेना हर परिस्थिति में सतर्क, तैयार और दृढ़ संकल्पित रहेगी। उनका कहना है कि वायुसेना का संकल्प लगातार आधुनिक बनना, अपनी परिचालन क्षमता को मजबूत करना और देश की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार रहना है।