सीएम हेल्पलाइन 1076 : छत्तीसगढ़ में सुशासन के नवयुग का उद्घोष
लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था की सफलता केवल सत्ता संचालन में नहीं, बल्कि शासन और नागरिकों के बीच स्थापित विश्वास, संवाद और जवाबदेही में निहित होती है। जब किसी आम नागरिक की आवाज़ बिना किसी बाधा के शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुँचती है और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए उत्तरदायी तंत्र सक्रिय रूप से कार्य करता है, तभी सुशासन की अवधारणा वास्तविक अर्थों में साकार होती है। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रारंभ की जा रही सीएम हेल्पलाइन 1076 को प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
आज के दौर में शासन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन केवल योजनाओं की घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनकी अंतिम व्यक्ति तक पहुँच और शिकायतों के समयबद्ध समाधान से किया जाता है। लंबे समय से जन-शिकायत निवारण की व्यवस्थाएँ विभिन्न विभागों में बिखरी हुई थीं, जिसके कारण नागरिकों को अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अनेक शिकायतें समाधान की प्रतीक्षा में फाइलों तक सीमित होकर रह जाती थीं। ऐसे में एकीकृत शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 इस आवश्यकता की पूर्ति का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
यह पहल केवल शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को संस्थागत रूप देने का प्रयास भी है। दूरभाष, मोबाइल एप, वेब पोर्टल और व्हाट्सएप जैसे बहु-माध्यमीयविकल्पों के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएँ सहजता से दर्ज करा सकेंगे। इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद का दायरा विस्तृत होगा तथा डिजिटल सुशासन को नई गति मिलेगी।
देश के कई राज्यों, विशेषकर मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन व्यवस्था ने माडल के तौर पर साबित किया है कि यदि शिकायत निवारण तंत्र का संचालन गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ किया जाए, तो यह जनविश्वास अर्जित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। छत्तीसगढ़ ने भी इन अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप इस व्यवस्था का निर्माण किया है। किंतु किसी भी प्रणाली की सफलता उसके स्वरूप में नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित होती है।
यही कारण है कि राज्य सरकार ने इस हेल्पलाइन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर तैयारी की है। मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की टीम में मुकेश बंसल, पी. दयानंद, राहुल भगत, रजत बंसल और प्रभात मलिक जैसे अधिकारी हैं, जिन्हें जमीनी स्तर पर प्रशासनिक प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और डेटा विश्लेषण का व्यापक अनुभव है। वहीं सुशासन एवं अभिसरण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे रजत बंसल पूर्व में रायपुर नगर निगम में ‘निदान 1100’ जैसी शिकायत निवारण प्रणाली के संचालन का अनुभव रखते हैं, जन शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए रायपुर नगर निगम आयुक्त रहते हुए उन्होंने सिस्टम में कसावट लाने और नागरिकों के संतुष्टि स्तर को बढ़ाने जिस तरह से प्रभावी काम किया है वह आज भी नज़ीर मानी जाती है । इस तरह यह कोर टीम इस हेल्प लाइन को परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी ।
हालाँकि, वास्तविक चुनौती शिकायतों के पंजीयन से अधिक उनके गुणवत्तापूर्ण और स्थायी निराकरण की होगी।इसके लिए सी.एम हाउस के अधिकारी स्वयं जिलों में जाकर कलेक्टर , एस पी और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण भी दे रहे हैं ।ऐसे में यदि जिला प्रशासन से लेकर विभागीय सचिवों तक स्पष्ट जवाबदेही तय हो जाती है, शिकायतकर्ताओं से नियमित फ़ीड बैक प्राप्त की जाती है तथा निराकरण की स्वतंत्र समीक्षा सुनिश्चित होती है, तो यह व्यवस्था प्रशासनिक सुधार का सशक्त माध्यम बनेगा और देश को जन शिकायत निवारण की सर्वोत्तम प्रणाली छत्तीसगढ़ से मिलेगा।दूसरी ओर, यह भी ध्यान रखना होगा कि शिकायतों का निस्तारण केवल आंकड़ों और प्रतिशतों का खेल बना तो इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य शिथिल हो जाएगा । इसके अलावा फर्जी शिकायतों, अनावश्यक प्रकरणों और बढ़ते कार्यभार से निपटने के लिए भी एक सक्षम तंत्र साथ साथ विकसित करना होगा। कई बार देखने में आता है कि अधिकारी केवल औपचारिक समाधान दर्ज कर प्रकरणों को बंद करने का प्रयास करते हैं। ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना इस व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए अति आवश्यक होगा। शिकायत निवारण में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का समन्वय ही इस प्रणाली की सफलता का आधार बनेगा।
निस्संदेह, सीएम हेल्पलाइन 1076 को केवल एक कॉल सेंटर या शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह शासन और जनता के बीच विश्वास के नए सेतु के निर्माण का अवसर है। इसकी सफलता तकनीक, संसाधन अथवा कॉल सेंटर की क्षमता से अधिक उस प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी, जो शिकायत को महज एक आंकड़ा नहीं बल्कि एक नागरिक की अपेक्षा मानकर उसका समाधान सुनिश्चित करे।
यदि मुख्यमंत्री सचिवालय, जिला प्रशासन और विभागीय तंत्र मिलकर इस व्यवस्था को परिणामोन्मुख बनाते हैं, तो सीएम हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई संस्कृति स्थापित कर सकती है। तब प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में रहने वाला नागरिक भी बिना सिफारिश, बिना भटकाव और बिना प्रतीक्षा अपनी समस्या के समाधान तक पहुँच सकेगा। यही किसी लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी और यही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की वास्तविक सफलता भी होगी।
