पुरी से अहमदाबाद तक उमड़ा आस्था का सागर: रथयात्रा में दिखी भक्ति और परंपरा की भव्यता

पुरी में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा शुक्रवार को शाम 4 बजे प्रारंभ होगी। सुबह मंगल आरती और विधिपूर्वक पूजन के बाद भगवान जगन्नाथ को नंदीघोष रथ, देवी सुभद्रा को दर्पदलन और भगवान बलभद्र को तालध्वज रथ पर विराजित किया गया।

रथों पर विराजमान होने के बाद भगवान की पूजा और भोग की रस्में की जाएंगी। दोपहर 3 बजे, पुरी राजघराने के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव पारंपरिक “छेरापहरा” की रस्म निभाएंगे। वे सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को बुहारेंगे, जिसके बाद रथ यात्रा का शुभारंभ होगा।

भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ लगभग तीन किलोमीटर दूर मौसी के घर माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा भक्ति, सेवा और परंपरा का अनूठा संगम मानी जाती है।

देशभर में रथयात्रा का उल्लास

पुरी के साथ-साथ देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से मनाई जा रही है। अहमदाबाद में सुबह 4 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगल आरती की। इसके पश्चात मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक ‘पाहिंड विधि’ (रथ मार्ग को बुहारने की रस्म) निभाकर रथयात्रा को हरी झंडी दिखाई।

इस वर्ष अहमदाबाद में रथ यात्रा निर्धारित समय से 10 मिनट पहले, सुबह 6:56 बजे शुरू हुई, जबकि आमतौर पर यह 7:10 बजे प्रारंभ होती है। भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। भगवान बलभद्र का रथ जमालपुर मंदिर से आगे बढ़ा।

वडोदरा में दुखद घटना

वडोदरा में रथ यात्रा की तैयारियों के दौरान एक पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। हरनी थाने में पदस्थ यह कांस्टेबल ड्यूटी के दौरान घबराहट और उल्टी की शिकायत के बाद सयाजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना रथयात्रा के उल्लास के बीच एक भावुक क्षण बन गई।

पारंपरिक विधियों का हुआ पालन

पुरी और अहमदाबाद दोनों ही स्थलों पर रथयात्रा की परंपराओं का पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक निर्वहन किया गया। रथों की पूजा, भगवान को रथों पर विराजित करना, तिलक और सज्जा की प्रक्रिया, और अंत में गजपति महाराज द्वारा छेरापहरा की रस्म – इन सभी ने इस पावन पर्व को और भी दिव्य बना दिया।