दंतेवाड़ा में बैलाडीला डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत पर खनन का विरोध: 7,200 पेड़ों की कटाई की तैयारी, 18 गांवों के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले स्थित बैलाडीला क्षेत्र में नंदराज पर्वत और डिपॉजिट-13 पर लौह अयस्क (Iron Ore) खनन के खिलाफ विरोध की आग एक बार फिर सुलगने लगी है। क्षेत्र के 18 गांवों के ग्रामीण और आदिवासी समाज नंदराज पहाड़ और जंगलों को बचाने के लिए एकजुट हो गए हैं।

डिपॉजिट-13 पहाड़ी तक रास्ता बनाने के लिए लगभग 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने और वन विभाग द्वारा मार्किंग पूरी किए जाने की खबर के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

तामोड़ी में जुटे 18 गांवों के प्रतिनिधि, बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार

तामोड़ी गांव में ‘संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति’ के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें तामोड़ी, गमपुर, डोलीगुड़ा और हिरोली सहित 18 गांवों के सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हुए।

बैठक में पर्यावरण बचाओ मंच, मूलवासी बचाओ मंच और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ नंदा कुंजाम, राजू भास्कर, जोगा कुंजाम, देवसिंह और मनीष कुंजाम समेत कई प्रमुख चेहरों ने भाग लिया।

ग्रामीणों की मुख्य चिंताएं और मांगें:

  1. धार्मिक आस्था से जुड़ा नंदराज पर्वत: नंदराज पर्वत स्थानीय बस्तर के आदिवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पर्वत पर खनन से उनकी धार्मिक संस्कृति और प्राकृतिक संतुलन नष्ट हो जाएगा।

  2. ग्रामसभा की अनदेखी पर सवाल: संविधान की 5वीं अनुसूची के तहत आने वाले इस क्षेत्र में बिना निष्पक्ष ग्रामसभा की सहमति के पेड़ों की कटाई और खनन प्रक्रिया शुरू करने का विरोध किया जा रहा है।

  3. एनएमडीसी से स्पष्टीकरण: ग्रामीणों ने नंदराज पर्वत की लीज NCL को हस्तांतरित किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है और NMDC से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

  4. पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक: ठेकेदार द्वारा शुरू की जा रही 7,200 पेड़ों की कटाई को तुरंत प्रभाव से रोकने की मांग उठाई गई है।

2019 में 100 करोड़ से ज्यादा का हुआ था नुकसान

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में भी डिपॉजिट-13 को लेकर ऐतिहासिक जन आंदोलन हुआ था। उस समय हजारों ग्रामीणों ने किरंदुल में NMDC चेकपोस्ट के सामने 5 दिनों तक चक्काजाम किया था, जिससे उत्पादन ठप हो गया था और एनएमडीसी को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा था।

अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी

संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति जल्द ही आंदोलन की तारीख और स्थान का औपचारिक ऐलान करेगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे इस बार राशन-पानी और जरूरी सामान के साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।