CG High Court Order: हाईकोर्ट से 15 डॉक्टरों को झटका, 3 साल की स्टडी लीव बढ़ाने की याचिकाएं खारिज; जानें कोर्ट का फैसला

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से परास्नातक (PG) मेडिकल की पढ़ाई कर रहे 15 सरकारी डॉक्टरों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डॉक्टरों की 24 महीने से बढ़ाकर 36 महीने (3 साल) की स्टडी लीव देने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ किया है कि सरकारी आदेशों का भूतपूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) नहीं होता और पुरानी छुट्टियों पर नए नियम लागू नहीं किए जा सकते।

1. 24 महीने की छुट्टी ले चुके डॉक्टरों की याचिकाएं खारिज

  • जस्टिस बीडी गुरु का फैसला: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए 15 सरकारी डॉक्टरों की ओर से दायर याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया।

  • पुराना लाभ पूरा हो चुका था: कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टर पूर्व में निर्धारित 24 महीने (2 वर्ष) की स्टडी लीव स्वीकृत करवाकर उसका पूरा लाभ ले चुके थे। ऐसे में वे बाद में संशोधित हुए सरकारी नियमों का हवाला देकर पुरानी लीव को बढ़ाने की मांग नहीं कर सकते।

2. क्या है 24 बनाम 36 महीने की स्टडी लीव का विवाद?

  • PG की पढ़ाई के लिए NOC: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत डॉ. भूमिका देवांगन, डॉ. सरिता मौर्या, डॉ. सुनीति जेम्स समेत 15 डॉक्टरों ने पीजी (PG) मेडिकल की पढ़ाई के लिए एनओसी (NOC) लेकर 24 महीने की स्टडी लीव ली थी।

  • 3 मार्च 2025 का नया संशोधन: राज्य सरकार ने 3 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2010 के नियम 44 में संशोधन करते हुए पीजी मेडिकल के लिए अध्ययन अवकाश की अधिकतम सीमा को 24 महीने से बढ़ाकर 36 महीने (3 साल) कर दिया था।

  • हाईकोर्ट में चुनौती: नए नियम के आधार पर डॉक्टरों ने सरकार के पास 36 महीने की छुट्टी का दावा पेश किया, जिसे शासन द्वारा खारिज करने पर डॉक्टरों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

3. हाईकोर्ट का तर्क और मुख्य टिप्पणियां

  1. पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया आदेश: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 3 मार्च 2025 का सरकारी आदेश पूर्व से स्वीकृत मामलों पर लागू नहीं होगा।

  2. स्वतः विस्तार का नियम नहीं: अधिकतम अवधि 36 महीने होने का अर्थ यह नहीं है कि पहले ली जा चुकी छुट्टियां अपने आप बढ़ जाएंगी, जब तक कि आदेश में विशेष तौर पर इसका उल्लेख न हो।

  3. समानता का गलत तर्क खारीज: याचिकाकर्ताओं ने डॉ. मीनाक्षी सूद का उदाहरण देते हुए समानता की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि वित्त विभाग की आपत्ति के बाद शासन ने 31 जुलाई 2026 को वह आदेश पहले ही वापस ले लिया था, इसलिए रद्द हो चुके आदेश के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

4. क्या कहता है ‘स्टडी लीव’ नियम?

  • सिविल सेवा नियम 2010: छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 44 के तहत सरकारी डॉक्टरों और कर्मचारियों को उच्च शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए स्टडी लीव दी जाती है।

  • 5 साल सेवा देने की अनिवार्य शर्त: नए नियमानुसार यदि कोई डॉक्टर 36 महीने की स्टडी लीव लेता है, तो उसे पढ़ाई पूरी होने के बाद कम से कम 5 वर्ष तक अनिवार्य रूप से सरकारी अस्पताल या सेवा में काम करना होगा।