मुनगे से पोषण की बेहतरीन पहल: ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने की छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा’ अभियान की तारीफ

रायपुर, 27 सितम्बर: कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का विशेष उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पोषण की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली इस पहल की जमकर सराहना की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को की थी शुरुआत

छत्तीसगढ़ में सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का मुख्य उद्देश्य मुनगा (सहजन) के पौधे को घर-घर पहुंचाने के साथ-साथ परिवार को पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूक करना है।

पोषक तत्वों का खजाना है मुनगा

मुनगा स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध पौधा है, जो पोषण, औषधीय गुणों और हरियाली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है:

  • पोषक तत्व: विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन से भरपूर।

  • विशेष ध्यान: महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण पर केंद्रित।

  • आंगनबाड़ी केंद्र बने आधार: आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से परिवारों को मुनगा के उपयोग और पोषण के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।

प्रदेशभर में 10 लाख 29 हजार से अधिक पौधों का वितरण

‘हर घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों और आम नागरिकों के घरों में अब तक कुल 10,029,831 मुनगा पौधों का वितरण किया जा चुका है।

प्रमुख जिलों में पौधों के वितरण का विवरण:

  • जशपुर: 1,62,271 पौधे

  • कोरबा: 1,01,002 पौधे

  • कबीरधाम: 75,776 पौधे

  • सूरजपुर: 64,599 पौधे

  • जांजगीर-चांपा: 57,653 पौधे

  • बालोद: 50,933 पौधे

  • धमतरी: 48,833 पौधे

  • सरगुजा: 43,754 पौधे

  • कांकर: 43,071 पौधे

  • दुर्ग: 42,474 पौधे

  • रायपुर: 23,948 पौधे

स्थानीय संसाधनों से सामुदायिक भागीदारी की मिसाल

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय घर के आंगन में लगने वाले सहज पौधे को माध्यम बनाया गया है। यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता की नई मिसाल कायम कर रहा है।