अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए समाज को एकजुट करने में अशोक सिंघल जी का योगदान अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 27 सितंबर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित श्री अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह के उद्घाटन अवसर पर शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने श्री अशोक सिंघल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक थे अशोक सिंघल

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का संपूर्ण जीवन समाज को संगठित करने, सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा।

उन्होंने कहा कि:

“अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की आकांक्षा को व्यापक जनभावना से जोड़ने और इसके लिए समाज को एकजुट करने में श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं, जो अनेक पीढ़ियों के संघर्ष, तप और समर्पण का परिणाम है।”

प्रभु श्रीराम और छत्तीसगढ़ का संबंध अत्यंत आत्मीय

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास काल के दौरान प्रभु राम ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर लंबा समय बिताया था। शिवरीनारायण की धरती पर माता शबरी की भक्ति इसका अनुपम उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ का उल्लेख करते हुए बताया:

  • प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक सुगंधित चावल अयोध्या भेजे गए थे।

  • श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम जाकर प्रभु राम के दर्शन कर चुके हैं।

छत्तीसगढ़ से जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ गौरव की बात

सीएम साय ने कहा कि अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के तीन दिवसीय समारोह का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की पावन धरती से होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उनके जीवन से दृढ़ संकल्प, संगठन और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर संत परमात्मानंद जी महाराज, संत श्री युधिष्ठिर लाल जी, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, श्री अम्बरीश, श्री टोपलाल वर्मा, श्री राजाराम, श्री कुलवंत सिंह सैनी सहित कई संतगण, देश-विदेश से आए पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।