विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) पर गर्माई सियासत: चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर घमासान, विपक्ष ने बोला हमला

नई दिल्ली:
मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। आयोग में कथित अंदरूनी मतभेद की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों (कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई-एम, सपा) ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आयोग में अंदरूनी मतभेद पर विपक्ष का हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और डेटा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर आयोग के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इसके सामने आते ही विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन और रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
चुनाव आयोग की सफाई: फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
विपक्ष के हमलों और विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था होने के नाते आंतरिक चर्चाओं में अलग-अलग विचार और सुझाव आना एक सामान्य और पारदर्शी प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।

