रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा प्रहार: नए टैरिफ कानून पर किए दस्तखत, भारत की चिंता बढ़ी

वॉशिंगटन / नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से एक कड़े प्रतिबंध एवं टैरिफ कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस नए कानून के तहत अमेरिका को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का अधिकार मिल गया है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम से भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, जो बड़े पैमाने पर रूसी कच्चे तेल का आयात करते हैं।
कानून के मुख्य बिंदु:
100% तक टैरिफ का प्रावधान: इस कानून के तहत अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों के उत्पादों पर 100% तक का भारी शुल्क लगा सकता है।
छाया बेड़े (Shadow Fleet) पर कार्रवाई: यह कानून रूसी तेल के अवैध परिवहन और प्रतिबंधों को चकमा देने वाले जहाजों के नेटवर्क पर भी कड़े प्रतिबंध लगाता है।
राष्ट्रपति को विशेष अधिकार: इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर टैरिफ की दरें तय कर सकते हैं या छूट दे सकते हैं।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और 1.4 अरब नागरिकों को किफायती ईंधन उपलब्ध कराने के लिए बड़ी मात्रा में रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहा है।
निर्यात पर संकट: यदि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 100% का अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती: भारत के सामने अब यह चुनौती होगी कि वह अपने ऊर्जा स्रोतों का और अधिक विविधीकरण (Diversification) करे या अमेरिका के साथ कूटनीतिक रास्ते से इस मुद्दे का समाधान निकाले।
भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है और स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

