भारत का ब्यूटी बाजार बना ग्लोबल निवेश का नया ठिकाना, देसी ब्रांड्स पर दुनिया की नजर
नई दिल्ली। भारत का तेजी से विस्तार करता ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार अब सिर्फ घरेलू कंपनियों और उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रह गया है। देश के उभरते ब्रांड्स, बदलती उपभोक्ता पसंद और डिजिटल पहुंच ने भारत को दुनिया की बड़ी कॉस्मेटिक्स कंपनियों और निवेशकों के लिए आकर्षक बाजार बना दिया है।
भारतीय ब्यूटी इंडस्ट्री में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का अंदाजा हाल के बड़े कारोबारी सौदों और निवेश से लगाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड्स में हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं, वहीं घरेलू कंपनियां भी तेजी से अपने उत्पादों और कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
इसी बदलाव की एक प्रमुख मिसाल फॉरेस्ट एसेंशियल्स है। मीरा कुलकर्णी द्वारा शुरू की गई यह कंपनी एक छोटे भारतीय उद्यम से आगे बढ़कर प्रीमियम आयुर्वेदिक ब्यूटी ब्रांड के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है। कंपनी की सफलता ने यह दिखाया है कि भारतीय परंपराओं और आधुनिक ब्रांडिंग के मेल से वैश्विक स्तर पर मजबूत उपभोक्ता बाजार तैयार किया जा सकता है।
23 अरब डॉलर से 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है बाजार
भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर कारोबार बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2025 में इस बाजार का आकार करीब 23 अरब डॉलर यानी लगभग 2.20 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। अनुमान है कि दशक के अंत तक यह बढ़कर लगभग 40 अरब डॉलर यानी करीब 3.83 लाख करोड़ रुपये हो सकता है।
इस वृद्धि की रफ्तार देश की समग्र अर्थव्यवस्था और रिटेल बाजार की तुलना में काफी तेज मानी जा रही है। बढ़ती आय, शहरीकरण, युवाओं की बदलती पसंद और व्यक्तिगत ग्रूमिंग को लेकर बढ़ती जागरूकता इस सेक्टर को लगातार आगे बढ़ा रही है।
बढ़ती आय ने बदली खरीदारी की आदत
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय परिवारों की आय बढ़ने के साथ उनकी प्राथमिकताओं में भी बदलाव आया है। पहले ब्यूटी प्रोडक्ट्स को रोजमर्रा की जरूरतों की तुलना में गैर-जरूरी खर्च माना जाता था। अब स्किनकेयर, हेयरकेयर, मेकअप, फ्रेगरेंस और पर्सनल ग्रूमिंग जैसे उत्पादों पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
रेडसीर के अनुमान के मुताबिक, भारत में प्रति व्यक्ति आय उस स्तर को पार कर चुकी है जहां उपभोक्ता आवश्यक वस्तुओं के अलावा अपनी पसंद और लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पादों पर भी अधिक खर्च करना शुरू करते हैं। आने वाले वर्षों में अधिक आय वाले परिवारों की संख्या बढ़ने से ब्यूटी बाजार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इंटरनेट ने छोटे ब्रांड्स के लिए खोला बड़ा बाजार
ब्यूटी इंडस्ट्री की कहानी में डिजिटल क्रांति भी बेहद महत्वपूर्ण है। ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग ने नए ब्रांड्स को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने का मौका दिया है।
अब किसी नए ब्यूटी ब्रांड के लिए बड़े शहरों में महंगे स्टोर खोलना ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियां सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकती हैं, उत्पादों के बारे में जानकारी दे सकती हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पहचान बना सकती हैं।
ग्लोबल कंपनियों के लिए भारत क्यों खास?

भारत में बड़ी युवा आबादी, बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, तेजी से विकसित होता ई-कॉमर्स नेटवर्क और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित कर रही है।
भारतीय उपभोक्ता अब केवल कम कीमत वाले उत्पादों तक सीमित नहीं हैं। वे ब्रांड की गुणवत्ता, सामग्री, पैकेजिंग, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक खूबियों के साथ-साथ प्रोडक्ट के अनुभव को भी महत्व दे रहे हैं।
यही वजह है कि भारतीय ब्यूटी बाजार में अब लोकल ब्रांड्स और ग्लोबल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ निवेश और साझेदारी का दौर भी तेज हो रहा है।
देसी पहचान से ग्लोबल ब्रांड तक
भारतीय ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब देश की पारंपरिक सुंदरता और आयुर्वेद आधारित अवधारणाएं आधुनिक ब्रांडिंग के साथ वैश्विक बाजार में जगह बना रही हैं।
फॉरेस्ट एसेंशियल्स जैसी कंपनियों की सफलता ने दूसरे भारतीय उद्यमियों के लिए भी एक नया रास्ता तैयार किया है। आने वाले वर्षों में भारतीय ब्यूटी बाजार में नए ब्रांड्स के उभरने, विदेशी निवेश बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी और मजबूत होने की संभावना है।
यानी भारत का ब्यूटी बाजार अब सिर्फ खूबसूरती का कारोबार नहीं, बल्कि ग्लोबल निवेश और नए उपभोक्ता भारत की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
