चीनी के दाम ने छुआ नया शिखर! एक महीने में करीब ₹8 की बढ़ोतरी, त्योहारों से पहले सरकार ने उठाए कदम
नई दिल्ली। देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त को देश के खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। खास बात यह है कि करीब एक महीने पहले यही कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
यानी एक महीने के भीतर चीनी के खुदरा भाव में लगभग 7.50 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, 20 अगस्त 2025 को चीनी की कीमत करीब 46.30 रुपये प्रति किलो थी। इस लिहाज से पिछले साल की तुलना में भी कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आया है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
जन्माष्टमी के साथ देश में त्योहारों का सिलसिला शुरू होने वाला है। आने वाले दिनों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का सीधा असर घरेलू बजट के साथ-साथ मिठाई और खाद्य कारोबार पर भी पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी के मौजूदा भाव असामान्य रूप से ऊंचे हैं। मौसम से जुड़ी परिस्थितियों, उत्पादन में कमी और बाजार में उपलब्धता जैसे कई कारकों को कीमतों में तेजी की वजह माना जा रहा है।
गन्ने की बुआई में बड़ी गिरावट नहीं, फिर भी उत्पादन पर असर
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच एक अहम सवाल यह है कि जब गन्ने की खेती का रकबा बहुत ज्यादा कम नहीं हुआ, तो चीनी महंगी क्यों हो रही है?
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस साल देश में गन्ने की बुआई पिछले साल के आसपास ही रही है। इतना ही नहीं, मौजूदा बुआई क्षेत्र पिछले पांच वर्षों के औसत से करीब चार लाख हेक्टेयर अधिक बताया जा रहा है।
इसके बावजूद चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने की बात सामने आई है। यही अंतर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर दबाव डाल रहा है।
अनुमान से कम हुआ चीनी उत्पादन
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष केतन पटेल के अनुसार, 2025-26 चीनी वर्ष में देश में करीब 3.2 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। लेकिन वास्तविक उत्पादन लगभग 3 करोड़ टन के आसपास रहने की बात कही गई है।
करीब 20 लाख टन का यह अंतर घरेलू बाजार में आपूर्ति की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बिगड़ने पर बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक
ब्राजील के बाद भारत दुनिया में चीनी उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर है। देश में गन्ने से चीनी बनाने वाली 703 चीनी मिलें हैं। इनमें 335 निजी, 325 सहकारी और 43 सरकारी मिलें शामिल हैं।
भारत में चीनी का उत्पादन चक्र अक्टूबर से शुरू होकर अगले वर्ष सितंबर तक चलता है। इसलिए मौजूदा कीमतों का असर नई चीनी उत्पादन अवधि शुरू होने तक बाजार में बना रह सकता है।
सरकार ने निर्यात पर लगाई रोक
बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
इसके अलावा सरकार ने थोक व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की है। स्टॉक लिमिट लागू करने का मकसद जमाखोरी और कृत्रिम कमी की आशंका को कम करना माना जा रहा है।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
चीनी की कीमत में करीब एक महीने में हुई तेज बढ़ोतरी का असर सिर्फ घरों की रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और चीनी का इस्तेमाल करने वाले अन्य खाद्य उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार के निर्यात प्रतिबंध और स्टॉक लिमिट जैसे कदमों से आने वाले त्योहारों के दौरान चीनी के दाम नीचे आएंगे? आने वाले दिनों में घरेलू मांग, उपलब्ध स्टॉक और नए चीनी सीजन के उत्पादन की तस्वीर इस सवाल का जवाब तय करेगी।
