रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला कॉरिडोर: 10 फीट ऊंची दीवार बनी ग्रामीणों के लिए मुसीबत, घर और खेत दो हिस्सों में बंटे

रायपुर: रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क परियोजना के निर्माण कार्य के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। रायपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में एक्सप्रेसवे के किनारे उठाई जा रही लगभग 10 फीट ऊंची कंक्रीट दीवार के कारण कई गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

घर, खेत और स्कूल दो हिस्सों में कटे

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ उठाई गई ऊंची दीवारों के कारण उनके घर एक तरफ और खेती योग्य जमीन व स्कूल दूसरी तरफ हो गए हैं। रोजाना खेत जाने या बच्चों को स्कूल भेजने के लिए ग्रामीणों को अब कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के शुरुआती सर्वे और निर्माण योजना के दौरान उनसे जो अंडरपास और सर्विस रोड देने के वादे किए गए थे, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया है।

ग्रामीणों में आक्रोश, अंडरपास और सर्विस रोड की मांग

रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाने के कारण प्रभावित गांवों के लोगों में शासन-प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खिलाफ काफी असंतोष है। ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर मांग की है कि:

  • अंडरपास का निर्माण: ग्रामीणों और मवेशियों की आवाजाही के लिए तत्काल प्रभाव से सब-वे या अंडरपास का निर्माण किया जाए।

  • सर्विस रोड: एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ समानांतर सर्विस रोड बनाई जाए ताकि स्थानीय यातायात प्रभावित न हो।

ग्रामीणों का कहना: “हमारी जमीनें इस परियोजना के लिए चली गईं, और अब जो 10 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई है, उससे हमारा अपने ही खेतों और गांव के दूसरे हिस्से में जाना मुश्किल हो गया है। प्रशासन को तुरंत हमारी सुविधा के लिए रास्ता बनाना चाहिए।”

प्रशासनिक हस्तक्षेप की उम्मीद

मामला तूल पकड़ने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि NHAI के अधिकारियों के साथ बैठक कर तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) के आधार पर अंडरपास या कट-आउट का रास्ता निकाला जाएगा।