नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस मानकों को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। लगातार बढ़ती चोटों, खिलाड़ियों की फिटनेस पर उठ रहे सवालों और हालिया विदेशी दौरों के अनुभवों के बाद बोर्ड ने फिटनेस मूल्यांकन प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। अब खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट और 2 किलोमीटर रन के नए मानकों को पूरा करना होगा, जबकि मेडिकल टीम और टीम मैनेजमेंट के बीच समन्वय भी मजबूत किया जाएगा।
ब्रोंको टेस्ट का समय हुआ कम
नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को 1,200 मीटर का ब्रोंको टेस्ट पहले की तुलना में कम समय में पूरा करना होगा। इसके साथ ही 2 किलोमीटर दौड़ के लिए भी तय समय सीमा निर्धारित की गई है। BCCI का मानना है कि इससे खिलाड़ियों की वास्तविक फिटनेस, सहनशक्ति और मैच के दौरान प्रदर्शन का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
क्या होता है ब्रोंको टेस्ट?
ब्रोंको टेस्ट मूल रूप से रग्बी में इस्तेमाल होने वाला फिटनेस टेस्ट है, जिसे अब क्रिकेट में भी अपनाया जा रहा है। इसमें खिलाड़ी को लगातार 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की शटल दौड़ पांच बार पूरी करनी होती है। कुल दूरी 1,200 मीटर होती है और इसमें बीच में कोई विश्राम नहीं मिलता। यह टेस्ट खिलाड़ी की गति, स्टैमिना और रिकवरी क्षमता को मापता है।
चोटों के बाद लिया गया बड़ा फैसला
हाल के महीनों में भारतीय टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोट के कारण टीम से बाहर रहे। इंग्लैंड दौरे के दौरान भी खिलाड़ियों की फिटनेस और बार-बार मांसपेशियों में खिंचाव की घटनाओं ने बोर्ड की चिंता बढ़ाई। इसी कारण BCCI ने फिटनेस मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एक समान बनाने का निर्णय लिया है।
फिजियो और मेडिकल टीम की जवाबदेही बढ़ी
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस में कमी दिखाई देती है, तो मेडिकल टीम और फिजियो को इसकी जानकारी तुरंत टीम मैनेजमेंट को देनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खिलाड़ी के अनुभव या स्टार दर्जे के आधार पर फिटनेस मानकों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। सभी खिलाड़ियों पर समान नियम लागू होंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका अहम
बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) अब खिलाड़ियों के फिटनेस परीक्षण और रिकवरी कार्यक्रम की निगरानी करेगा। बोर्ड का उद्देश्य सभी केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों के लिए एक समान फिटनेस मानक लागू करना है, ताकि चयन और वापसी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके।
विशेषज्ञों की राय
फिटनेस विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में लगातार मैचों और व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अत्यधिक फिटनेस टेस्ट और लगातार प्रशिक्षण से खिलाड़ियों पर अतिरिक्त शारीरिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए फिटनेस और रिकवरी के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक होगा।
भारतीय क्रिकेट पर क्या होगा असर?
BCCI का मानना है कि नए फिटनेस मानकों से खिलाड़ियों की चोटों में कमी आएगी, मैदान पर उनकी चुस्ती बढ़ेगी और टीम का प्रदर्शन अधिक स्थिर होगा। आने वाले समय में राष्ट्रीय टीम के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट में भी इन मानकों को व्यापक रूप से लागू किए जाने की संभावना है।