झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद गहराया, छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए रखी शर्त; जांच में 19 गिरफ्तार

रांची। झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में कई दिनों से चल रहे धरने के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों ने राज्य सरकार से बातचीत के लिए सहमति तो जताई है, लेकिन स्पष्ट किया है कि वार्ता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी और मीडिया के सामने होनी चाहिए। इसी बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी तेज हुई है और अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सरकार से संवाद को तैयार, लेकिन पारदर्शिता की मांग

छात्र नेताओं का कहना है कि वे समाधान चाहते हैं, लेकिन बातचीत पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका आरोप है कि केवल सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ बंद कमरे में वार्ता करने से आंदोलन की मूल मांगें कमजोर पड़ सकती हैं। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से खुले संवाद और मीडिया की उपस्थिति में चर्चा करने की मांग रखी है।

13वें दिन भी जारी रहा आंदोलन

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना लगातार जारी है। कई छात्र अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।

भर्ती परीक्षा विवाद की शुरुआत कैसे हुई

विवाद तब शुरू हुआ जब JPSC की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ जारी न करने, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और कथित OMR अनियमितताओं के आरोप लगाए। विवाद बढ़ने के बाद मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया गया और जांच शुरू हुई।

CID की कार्रवाई, गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ी

जांच के दौरान झारखंड CID ने पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 19 हो गई है। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन दस्तावेज और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

सरकार ने वार्ता का दिया प्रस्ताव

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित की है। सरकार का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और संवैधानिक तथा कानूनी दायरे में उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि प्रदर्शनकारी सीधे मुख्यमंत्री से बातचीत पर जोर दे रहे हैं।

आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों के आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिलने लगा है। इससे राज्य सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ा है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर प्रस्तावित वार्ता पर टिकी है। यदि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनती है, तो भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा, जांच की दिशा और आगे की परीक्षाओं को लेकर महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। दूसरी ओर, यदि वार्ता विफल रहती है तो आंदोलन और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।