रायपुर नगर निगम का बड़ा कारनामा: RTI जवाब में पहले कहा ‘जानकारी विस्तृत है’, 4 महीने बाद बोले—’हमारे पास तो रिकॉर्ड ही नहीं’
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नगर निगम में महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और फाइलों के गायब होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब केंद्र सरकार के 15वें वित्त आयोग से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस आयोग के अंतर्गत आईईसी (इन्फॉर्मेशन, एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन) मद में हुए करोड़ों रुपए के खर्च को लेकर नगर निगम के दो विरोधाभासी आरटीआई (RTI) जवाबों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पहले कहा ‘जानकारी विस्तृत है’, फिर मुकरे अफसर
दरअसल, एक आरटीआई आवेदन के जरिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक पीआर (PR) एवं आईईसी (IEC) मद में किए गए कार्यों और खर्च का ब्यौरा मांगा गया था।
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17 मार्च 2026 का जवाब: अधीक्षण अभियंता ने पत्र जारी कर कहा कि मांगी गई जानकारी अत्यंत विस्तृत प्रकृति की है, इसलिए इसे सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत उपलब्ध कराना संभव नहीं है। (तब रिकॉर्ड गायब होने की बात नहीं कही गई)।
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14 जुलाई 2026 का जवाब: जब आवेदक ने वर्षवार (2022-23 और 2023-24) अलग-अलग आवेदन लगाकर सीमित जानकारी मांगी, तो कार्यपालन अभियंता ने लिखित जवाब दिया कि संबंधित वर्षों के व्यय की जानकारी विभाग में उपलब्ध ही नहीं है।
करोड़ों का खेल: चहेती फर्म को फायदा पहुँचाने 5वीं बार निकाला टेंडर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मद के तहत अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपए का मनमाना व्यय किया गया है, लेकिन अब उसका रिकॉर्ड गायब है। वर्तमान में इसी आईईसी कार्य के लिए 50 लाख रुपए के टेंडर का खेल पिछले 6 महीनों से चल रहा है।
तकनीकी पेंच फंसाकर पांचवीं बार निविदा (टेंडर) निकाली गई है, ताकि अपनी चहेती फर्म को उपकृत किया जा सके। इस मामले में तत्कालीन निगम आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देशों को भी हवा में उड़ा दिया गया। तत्कालीन आयुक्त ने निविदा में गंभीर खामियां पाते हुए उसे निरस्त किया था और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने को कहा था, लेकिन उनके जाते ही अफसरों ने निर्देशों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया।
क्या साक्ष्य मिटाने के लिए गायब की गईं फाइलें?
पीआर और आईईसी मद के तहत जनता के पैसों से जन-जागरूकता अभियान, होर्डिंग्स, मीडिया गतिविधियां और प्रचार-प्रसार का काम किया जाता है, जिसका रिकॉर्ड सरकारी अभिलेख में होना अनिवार्य है। मार्च 2026 में जब विभाग ने इसे “विस्तृत जानकारी” बताया, तो साफ था कि फाइलें मौजूद थीं। लेकिन महज 4 महीने के भीतर ऐसा क्या हुआ कि विभाग के पास रिकॉर्ड ही नहीं बचा? रायपुर नगर निगम में पहले भी फाइलें गायब होने के मामले आ चुके हैं, जिससे अब यह आशंका गहरी हो गई है कि साक्ष्य मिटाने के लिए यहाँ कोई बड़ा सिंडीकेट काम कर रहा है।
बॉक्स न्यूज़: विरोधाभास एक नज़र में
| तारीख | विभाग का जवाब | प्रशासनिक संकेत |
| 17 मार्च 2026 | जानकारी बहुत विस्तृत है, धारा 2(एफ) के कारण देना संभव नहीं। | फाइलें विभाग में सुरक्षित थीं। |
| 14 जुलाई 2026 | संबंधित वर्षों के PR-IEC व्यय की जानकारी विभाग में उपलब्ध नहीं है। | फाइलें/रिकॉर्ड गायब कर दिए गए हैं। |
खड़े हो रहे गंभीर सवाल:
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यदि रिकॉर्ड पहले से नहीं था, तो मार्च में इसे “विस्तृत जानकारी” क्यों बताया गया?
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क्या महज चार महीनों के भीतर साक्ष्य मिटाने के लिए फाइलें गायब कर दी गईं?
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जनता के पैसों के इस भारी-भरकम खर्च का रिकॉर्ड गायब होने पर क्या कोई उच्च स्तरीय जांच होगी?
