अमेरिका में H-1B वीजा नियम होंगे सख्त: विश्वविद्यालयों को मिलने वाली छूट पर लगेगी लगाम, ग्रीन कार्ड के नियम भी बदलेंगे

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका में H-1B वीजा नियम को और अधिक सख्त (Stricter) बनाने की तैयारी की जा रही है। इस नए कदम से न केवल वीजा मिलने की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है, बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों को अब तक मिलने वाली विशेष छूट भी सीमित की जा सकती है।

विश्वविद्यालयों की छूट पर कस सकता है शिकंजा

मौजूदा आव्रजन (Immigration) नीतियों के तहत, अमेरिकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध अनुसंधान संगठनों (Research Organizations) को H-1B वीजा की वार्षिक सीमा (Cap) से छूट मिलती है। लेकिन नए प्रस्तावों के अनुसार, इस छूट के दायरे को छोटा या सीमित किया जा सकता है। इसका सीधा असर उन विदेशी पेशेवरों और शोधकर्ताओं पर पड़ेगा जो अमेरिकी शिक्षण संस्थानों के माध्यम से वहां काम कर रहे हैं।

ग्रीन कार्ड के नियमों में भी बदलाव की संभावना

वीजा नियमों को कड़ा करने के साथ-साथ, अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड (Green Card) से जुड़े नियमों में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

भारतीयों पर क्या होगा असर? ग्रीन कार्ड आवंटन के नियमों में बदलाव होने से वहां सालों से इंतजार कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों का इंतजार और लंबा हो सकता है या फिर योग्यता के मानकों को और कड़ा किया जा सकता है।

क्यों उठाए जा रहे हैं ये कदम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन नियमों में बदलाव का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी श्रम बाजार (Labor Market) में स्थानीय नागरिकों के हितों की रक्षा करना और वीजा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना है। हालांकि, यदि ये नियम लागू होते हैं, तो भारतीय टेक कंपनियों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ जाएंगी।