ईरान-अमेरिका तनाव: इजराइल ने अमेरिका को किया अलर्ट, ट्रम्प की हत्या की साजिश और होर्मुज स्ट्रेट में युद्ध की चेतावनी
वॉशिंगटन/तेहरान, 10 जुलाई 2026: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी (Iran-US Tension) अब सीधे टकराव में बदलती नजर आ रही है। इस बीच इजराइल की खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका को एक बड़ा और बेहद संवेदनशील इनपुट देकर अलर्ट किया है।
इजराइल द्वारा साझा की गई खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की एक गंभीर साजिश रच रहा है। इस इनपुट के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और पेंटागन पूरी तरह हाई अलर्ट पर आ गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में दखल पर ईरान की खुली चेतावनी
इधर, इजराइल के अलर्ट और अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच ईरान ने भी बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान सरकार और सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी जारी की है।
ईरान की ओर से कहा गया है— “यदि अमेरिका ने वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रूट होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में किसी भी तरह का सैन्य दखल या हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उसे इसका बेहद करारा और गंभीर जवाब दिया जाएगा।”
उल्लेखनीय है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहाँ से दुनिया भर के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
अमेरिका की बड़ी कार्रवाई: 2 दिनों में 170 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले
ईरान समर्थित गुटों और मिलिशिया की ओर से बढ़ते खतरों को देखते हुए अमेरिकी सेना ने भी अपनी आक्रामक कार्रवाई तेज कर दी है। पेंटागन के निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने पिछले 48 घंटों (दो दिनों) के भीतर ईरान समर्थित चरमपंथियों के 170 से अधिक ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं।
अमेरिकी हमलों से जुड़े मुख्य बिंदु:
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ठिकानों पर निशाना: इन हमलों में ईरान समर्थित गुटों के हथियार डिपो, कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
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रणनीतिक दबाव: अमेरिका का यह कदम ईरान को बैकफुट पर लाने और क्षेत्रीय सहयोगियों (जैसे इजराइल) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह सैन्य गतिरोध और बढ़ता है, तो यह स्थिति एक पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) का रूप ले सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
