“बेबी ब्रह्मोस” परियोजना: कम लागत वाली नई मिसाइल पर काम, भविष्य की युद्ध रणनीति पर फोकस

नई दिल्ली से रिपोर्ट |

भारत में “बेबी ब्रह्मोस” नाम से चर्चित एक नई हल्की और कम लागत वाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल परियोजना पर काम तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना मौजूदा BrahMos missile के कॉम्पैक्ट और अधिक लचीले संस्करण के रूप में विकसित की जा रही है।

इसका उद्देश्य भविष्य की युद्ध रणनीति में तेज, सटीक और किफायती स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करना है।

क्या है “बेबी ब्रह्मोस”?

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • यह मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल से आकार में छोटी और वजन में हल्की हो सकती है।

  • कम लागत के कारण बड़े पैमाने पर तैनाती संभव होगी।

  • इसे लड़ाकू विमानों, नौसेना प्लेटफॉर्म और संभावित रूप से भूमि-आधारित लॉन्चर से दागा जा सकेगा।

हालांकि आधिकारिक तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इसे “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों जरूरी है कम लागत वाली मिसाइल?

आधुनिक युद्ध में “हाई-इंटेंसिटी, हाई-वॉल्यूम” स्ट्राइक क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मुख्य कारण:

  1. बड़ी संख्या में त्वरित हमले की क्षमता

  2. दुश्मन के एयर डिफेंस को ओवरवेल्म करना

  3. सीमित बजट में अधिक मारक क्षमता

कम लागत वाली उन्नत मिसाइलें लंबी अवधि की रणनीतिक तैयारी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

भविष्य की युद्ध रणनीति से जुड़ाव

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, भारत की सैन्य रणनीति अब “नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर” और “प्रिसिजन स्ट्राइक” सिद्धांत की ओर बढ़ रही है।

  • लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता

  • मल्टी-डोमेन ऑपरेशन (भूमि, वायु, समुद्र)

  • तेज प्रतिक्रिया समय

“बेबी ब्रह्मोस” जैसे प्रोजेक्ट भविष्य की इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे हैं।

रणनीतिक महत्व

भारत पहले ही ब्रह्मोस को कई प्लेटफॉर्म पर तैनात कर चुका है। इसका हल्का और कम लागत संस्करण:

  • निर्यात बाजार में भी अवसर पैदा कर सकता है

  • छोटे और मध्यम आकार के लड़ाकू विमानों के लिए उपयुक्त हो सकता है

  • सामरिक संतुलन को मजबूत कर सकता है

निष्कर्ष

“बेबी ब्रह्मोस” परियोजना भारत की रक्षा आधुनिकीकरण रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। कम लागत, उच्च सटीकता और बहु-प्लेटफॉर्म तैनाती की क्षमता इसे भविष्य की युद्ध नीति में महत्वपूर्ण बना सकती है।

आधिकारिक पुष्टि और तकनीकी विवरण सामने आने के बाद इसकी वास्तविक क्षमताओं का स्पष्ट आकलन संभव होगा।

You may have missed