IGKV में जूट प्रोडक्शन को बढ़ावा देने किसानों की ट्रेनिंग: रायपुर-धमतरी के 30 किसान शामिल हुए, विशेषज्ञ बोले — सिर्फ धान पर निर्भरता सही नहीं

रायपुर, छत्तीसगढ़ | 14 अक्टूबर 2025
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) रायपुर में आज जूट (पटसन) उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रायपुर और धमतरी जिलों के 30 प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने किसानों से कहा कि राज्य में कृषि को स्थायी और लाभदायक बनाने के लिए केवल धान पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं, बल्कि विविध फसलों को अपनाना समय की मांग है।

🌿 जूट उत्पादन पर जोर

कार्यशाला का आयोजन IGKV के कृषि विस्तार शिक्षा विभाग और केंद्रीय जूट अनुसंधान संस्थान (ICAR-NIRJAFT) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी जूट की खेती के लिए अनुकूल है, विशेषकर रायपुर, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों में।

विशेषज्ञ डॉ. एस.के. पांडेय ने कहा —

“धान की एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण है। जूट जैसी नकदी फसलें किसानों को अतिरिक्त आमदनी और मृदा स्वास्थ्य दोनों देती हैं।”

👨‍🌾 किसानों को मिली प्रायोगिक जानकारी

कार्यक्रम के दौरान किसानों को बीज चयन, बुवाई तकनीक, फाइबर ग्रेडिंग, और जूट प्रोसेसिंग की जानकारी दी गई।
उन्हें बताया गया कि जूट की फसल 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है, और इसका उपयोग बैग, रस्सी, कालीन, चटाई और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री बनाने में किया जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने जूट की प्रसंस्करण तकनीक और बाजार मूल्य श्रृंखला को भी नजदीक से समझा।

🧵 रोजगार और पर्यावरण दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों ने बताया कि जूट खेती से न केवल किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी बल्कि यह प्लास्टिक के विकल्प के रूप में पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
राज्य सरकार द्वारा “जूट मिशन छत्तीसगढ़ 2025” के तहत जूट उत्पादन को प्रोत्साहन देने की योजना पर भी चर्चा की गई।

🗣️ किसानों की प्रतिक्रिया

धमतरी जिले के किसान महेश यादव ने कहा —

“हमने हमेशा धान पर ही ध्यान दिया, लेकिन आज की ट्रेनिंग से पता चला कि जूट खेती से भी अच्छा मुनाफा और वैकल्पिक रोजगार मिल सकता है।”

किसानों ने इस प्रशिक्षण को लाभकारी और व्यवहारिक बताया और कहा कि वे अपने गांवों में जूट की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

🌾 IGKV की पहल

IGKV के कुलपति डॉ. गिरीश चंद्र सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य राज्य में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा —

“छत्तीसगढ़ का किसान बहुमुखी होगा तभी प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। जूट उत्पादन इस दिशा में एक अहम कदम है।”