झारखंड के पूर्व CM और JMM संरक्षक शिबू सोरेन का निधन, राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दिशोम गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में सुबह 8:56 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे और ब्रेन स्ट्रोक के कारण लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे।

शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी, डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी हालत पिछले कुछ दिनों से गंभीर बनी हुई थी। झारखंड सरकार ने उनके निधन पर 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। उनका पार्थिव शरीर आज शाम रांची लाया जाएगा।

राजनीतिक सफर और संघर्ष

शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक संरक्षक थे और यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे। चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा गांव में हुआ था। 13 साल की उम्र में उनके पिता की हत्या सूदखोर महाजनों ने कर दी थी। इसके बाद उन्होंने महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित करने का बीड़ा उठाया।

दिशोम गुरु बनने की कहानी

1970 में शिबू सोरेन ने धान कटनी आंदोलन की शुरुआत की और सूदखोरों के खिलाफ संघर्ष किया। इसी संघर्ष के दौरान एक बार महाजनों के गुंडों ने उन्हें घेर लिया, लेकिन उन्होंने बाइक सहित उफनती नदी में छलांग लगा दी और सुरक्षित तैरकर निकल आए। आदिवासी समाज ने इसे चमत्कार माना और उन्हें ‘दिशोम गुरु’ का नाम दिया, जिसका अर्थ है ‘देश का गुरु’।

तीन बार मुख्यमंत्री, पर सिर्फ 10 महीने का कार्यकाल

  • पहली बार 2 मार्च 2005 को CM बने, लेकिन 10 दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा।

  • दूसरी बार 27 अगस्त 2008 को मुख्यमंत्री बने, लेकिन उपचुनाव हारने के कारण 18 जनवरी 2009 को इस्तीफा दिया।

  • तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को पद संभाला, लेकिन 31 मई 2010 को इस्तीफा दे दिया।

राजनीतिक नेताओं की श्रद्धांजलि

  • सैयद शाहनवाज हुसैन: “वे देश के बड़े आदिवासी नेता थे, उनका जाना बड़ी क्षति है।”

  • बाबूलाल मरांडी: “शिबू सोरेन एक समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने साहूकारों और शराबबंदी के खिलाफ आंदोलन चलाए।”

  • राहुल गांधी: “आदिवासी समाज की मज़बूत आवाज़ थे, उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा।”

  • नीतीश कुमार: “उनका योगदान झारखंड और देश की राजनीति के लिए अपूरणीय है।”

शिबू सोरेन का जाना केवल झारखंड ही नहीं, पूरे देश के लिए एक युग का अंत है।