UN मुख्यालय के बाहर तिब्बती भिक्षु ने खुद को लगाई आग, इलाज के दौरान मौत; घटनास्थल से मिले ‘चीन तिब्बत छोड़ो’ के पर्चे
न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर से एक बेहद झकझोर देने वाली और बड़ी अंतर्राष्ट्रीय खबर सामने आई है। यहाँ मुख्य सड़क पर एक शख्स ने खुद को आग के हवाले कर दिया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है। घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर इसे चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक चरम विरोध-प्रदर्शन माना जा रहा है।
यह खौफनाक वाकया गुरुवार शाम (3 जुलाई 2026) को संयुक्त राष्ट्र परिसर के ठीक बाहर हुआ।
तिब्बती झंडा रखकर खुद को आग के हवाले किया
चश्मदीदों और सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के मुताबिक, एक 52 वर्षीय व्यक्ति बौद्ध भिक्षु (Buddhist Monk) के कपड़ों में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के पास पहुंचा था। उसने सबसे पहले परिसर के पास फुटपाथ पर तिब्बत का राष्ट्रीय झंडा रखा। इसके तुरंत बाद उसने अपने ऊपर कोई ज्वलनशील पदार्थ (Petroleum/Chemical) छिड़का और खुद को आग लगा ली।
वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD) ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए आग बुझाई और उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। दोस्तों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक की पहचान लोबगा रांगजेन के रूप में हुई है, जो बीते 20 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था।
पर्चे पर लिखा था— “चीन तिब्बत छोड़ो”
न्यूयॉर्क पुलिस को घटनास्थल की जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पर्चे और दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन पर्चों पर साफ शब्दों में लिखा था— “चीन को तिब्बत से निकालो” और “तिब्बत को आज़ाद करो”। इन सबूतों के बाद अमेरिकी प्रशासन इसे तिब्बत मुद्दे पर चीन के खिलाफ आत्मघाती विरोध मान रहा है।
UN का बयान: संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वाकये के वक्त सभी आधिकारिक बैठकें खत्म हो चुकी थीं, इसलिए संयुक्त राष्ट्र के नियमित कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
पृष्ठभूमि: आखिर क्यों आत्मदाह करते हैं तिब्बती?
चीन द्वारा तिब्बत पर किए गए जबरन नियंत्रण और वहां की सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिशों के खिलाफ आत्मदाह करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2009 से लेकर अब तक 150 से अधिक तिब्बती (जिनमें बौद्ध भिक्षु, साध्वियां, छात्र और आम नागरिक शामिल हैं) चीन के विरोध में खुद को आग लगाकर अपनी जान दे चुके हैं। तिब्बती संगठनों के मुताबिक, लोग चीन के कड़े शासन का विरोध करने, अपने सर्वोच्च धार्मिक गुरु दलाई लामा की तिब्बत वापसी और अपनी भाषाई पहचान को बचाने के लिए यह खौफनाक कदम उठाते हैं।
वैश्विक राजनीति और भारत का कनेक्शन
यह घटना वैश्विक स्तर पर ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में (मई 2026 में) चीन ने भारत को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा था कि वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी (Successor) के मामले से दूर रहे, क्योंकि तिब्बत पूरी तरह से चीन का आंतरिक हिस्सा है।
गौरतलब है कि भारत ने साल 1959 से ही तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और हजारों तिब्बती शरणार्थियों को मानवीय आधार पर धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में शरण दी हुई है, जिसे लेकर चीन हमेशा आपत्ति जताता रहा है। हालांकि, कूटनीतिक तौर पर भारत ‘तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र’ को चीन का हिस्सा मानता आया है।
