ताड़मेटला नरसंहार केस पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 16 साल बाद भी दोष सिद्ध नहीं

रायपुर।

ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि 76 CRPF जवानों की शहादत वाले इस बड़े नक्सली हमले में 16 साल बाद भी आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हो पाना बेहद पीड़ादायक स्थिति है।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों की सही पहचान और उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रही हैं। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि इतने बड़े हमले के बाद भी न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।

यह मामला देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है, जिसमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। घटना के बाद लंबे समय तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रही, लेकिन अब तक दोष सिद्ध नहीं हो सका है।

कानूनी और सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी जांच व्यवस्था और नक्सल मामलों में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं शहीद जवानों के परिवारों के लिए भी यह मामला अब तक न्याय की प्रतीक्षा का प्रतीक बना हुआ है।