भारत प्रत्यर्पण से पहले सौरभ चंद्राकर ने जताई जान को खतरे की आशंका, परिवार की सुरक्षा की भी मांग
नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में कथित प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर ने भारत प्रत्यर्पण से पहले अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ओमान में हिरासत में लिए गए चंद्राकर ने कथित तौर पर वहां के अधिकारियों के समक्ष आशंका जाहिर की है कि भारत लौटने के बाद जेल में उसकी जान को खतरा हो सकता है। उसने अपने साथ-साथ परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग भी की है।
चंद्राकर की ओर से कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि यदि उसे पर्याप्त सुरक्षा और निष्पक्ष माहौल उपलब्ध कराया जाता है, तो वह भारतीय जांच एजेंसियों के सामने ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर सकता है।
जांच एजेंसियों को जानकारी देने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, चंद्राकर ने कथित तौर पर सट्टा नेटवर्क से जुड़े लोगों, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद कथित संपत्तियों से संबंधित जानकारी देने की इच्छा जताई है। उसने राजनीतिक स्तर पर कथित संपर्कों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराने का दावा किया है।
उसका कहना है कि भारत लौटने के बाद वह सक्षम जांच एजेंसी और अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उसने मांग की है कि उसे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों से अलग रखा जाए, ताकि पूछताछ या बयान के दौरान उस पर किसी तरह का दबाव न हो।
परिवार को लेकर भी जताई चिंता
सौरभ चंद्राकर ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। कथित तौर पर उसका मानना है कि मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों के कारण उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता है।
उसने पूछताछ के दौरान न्यायिक निगरानी की मांग किए जाने की बात भी कही है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य संभावित सबूतों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ओमान में हिरासत के बाद भारत लाने की तैयारी
चंद्राकर फिलहाल ओमान में हिरासत में है। इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर ओमान पुलिस की कार्रवाई के बाद भारतीय एजेंसियां उसे देश वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं। प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनी प्रक्रिया के साथ ओमान में चल रही स्थानीय कानूनी कार्यवाही भी इस मामले का हिस्सा है।
बताया जा रहा है कि चंद्राकर ने वकील के माध्यम से ओमान में चल रही कुछ कानूनी प्रक्रियाओं को चुनौती दी है। भारत प्रत्यर्पण का अंतिम फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुरक्षा मांगने से खत्म नहीं होगी कानूनी कार्रवाई
चंद्राकर की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने को मामले में किसी तरह की कानूनी राहत के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। उसके द्वारा किए जा रहे दावों और संभावित खुलासों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र रूप से की जाएगी।
यदि जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसके विरुद्ध संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई जारी रह सकती है। सुरक्षा उपलब्ध कराना और जांच से कानूनी छूट मिलना दो अलग-अलग विषय हैं।
महादेव ऐप मामले में क्या है आरोप?
जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऐप से जुड़ा नेटवर्क कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी ऑनलाइन बेटिंग गतिविधियों से जुड़ा रहा है। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंच बनाई गई और विभिन्न बेटिंग प्लेटफॉर्म संचालित किए गए।
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि बेटिंग से होने वाली रकम को कई बैंक खातों और कथित म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से घुमाया जाता था। इसके बाद धन को कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए विदेशों तक पहुंचाया जाता था। एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा प्रभावशाली लोगों और सरकारी तंत्र में कथित संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
अब चंद्राकर के कथित खुलासों पर नजर
भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के बीच सौरभ चंद्राकर की सुरक्षा संबंधी मांग और जांच एजेंसियों को जानकारी देने के कथित दावे ने मामले को एक नया मोड़ दिया है। यदि वह भारत लौटने के बाद औपचारिक रूप से बयान दर्ज कराता है, तो उसके दावों की पुष्टि दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल निगाहें प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया और भारत आने के बाद चंद्राकर से होने वाली संभावित पूछताछ पर टिकी हैं।
