दुर्ग जिले के छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र, भोजन सहायता राशि 1200 से बढ़ाकर 3000 रुपए करने की मांग; जर्जर भवन,
गंदे शौचालय और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर जताई नाराजगी
दुर्ग-भिलाई। जिले के छात्रावासों में बदहाल व्यवस्थाओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर छात्र-छात्राओं का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दुर्ग जिले के अलग-अलग छात्रावासों के विद्यार्थियों ने बारिश के बीच प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि लंबे समय से छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं का समाधान करने के बजाय लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने जिला प्रशासन को शिकायत सौंपकर जिले के सभी छात्रावासों की व्यवस्थाओं, निर्माण कार्यों और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी अविनाश श्रीवास पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों ने संबंधित अधिकारी को पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
1200 रुपए में पूरे महीने का भोजन कैसे होगा?
छात्रों की सबसे प्रमुख मांग छात्रावासों में मिलने वाली भोजन सहायता राशि बढ़ाने को लेकर है। विद्यार्थियों के अनुसार वर्तमान में प्रति छात्र प्रतिमाह केवल 1200 रुपए भोजन सहायता के रूप में दिए जाते हैं। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में इतनी कम राशि में पूरे महीने पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल है।
छात्रों ने इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण समस्या उठाते हुए कहा कि कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली के तहत पूरे 12 महीने पढ़ाई होती है, लेकिन छात्रावासों में केवल 10 महीने की भोजन सहायता राशि मिलती है। शेष दो महीने विद्यार्थियों को भोजन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए परेशान होना पड़ता है। इसलिए उन्होंने पूरे 12 महीने भोजन सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
जर्जर भवन और खराब शौचालयों से परेशान विद्यार्थी
विद्यार्थियों ने शिकायत में बताया कि जिले के कई छात्रावासों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव के कार्य नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर शौचालयों की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई गई है।
छात्रों ने छात्रावासों में टेबल, कुर्सी, पलंग, बेडशीट, झाड़ू, पोछा, पर्याप्त लाइट और पंखे जैसी जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा बारिश के मौसम में परिसर में पानी भरने की समस्या को देखते हुए उचित जल निकासी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया है।
कंप्यूटर, वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें भी मांगीं
आज के डिजिटल दौर में शिक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों की आवश्यकता को देखते हुए विद्यार्थियों ने छात्रावासों में कंप्यूटर और वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त अध्ययन सामग्री और पुस्तकें नहीं मिल पातीं।
इसके अलावा खेलकूद सामग्री, वाटर फिल्टर, ठंडे पानी की व्यवस्था और मेस हॉल में टेबल-कुर्सियां उपलब्ध कराने की मांग भी शिकायत में शामिल है। विद्यार्थियों ने नियमित साफ-सफाई और छात्रावासों के बेहतर रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
मेंटेनेंस की राशि खर्च होने के बावजूद काम नहीं होने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से छात्रावासों में कोई ठोस निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, जबकि मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी राशि खर्च किए जाने की बात सामने आती रही है। इसी को लेकर उन्होंने सभी छात्रावासों में हुए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव कार्यों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा खर्च की गई राशि का ऑडिट कराने की मांग की है।
विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और यदि वित्तीय अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
कई मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई शिकायत
छात्रों ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहब और विभागीय सचिव को भी भेजी है।
गौरतलब है कि दुर्ग जिले से विधायक गजेंद्र यादव वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री हैं। ऐसे में जिले के छात्रावासों की व्यवस्था और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग और महत्वपूर्ण हो गई है।
बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन, प्रशासन के जवाब का इंतजार
छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था के विरोध में विद्यार्थियों ने बारिश के बावजूद अपना प्रदर्शन जारी रखा। उनकी मांग है कि केवल आश्वासन देने के बजाय छात्रावासों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया जाए और भोजन सहायता राशि, भवनों की मरम्मत, स्वच्छता तथा शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
फिलहाल विद्यार्थियों की मांगों और विभागीय अधिकारी पर लगाए गए आरोपों को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और छात्रावासों की व्यवस्था में सुधार के लिए कब तक ठोस कार्रवाई की जाती है।
