भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम के बाद छत्तीसगढ़ संगठन में बदलाव की चर्चा तेज, नए प्रभारी के नामों पर मंथन
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय टीम में बदलाव के बाद अब राज्यों के संगठनात्मक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से 17 अगस्त को नई टीम की घोषणा किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं।
फिलहाल पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नए प्रभारी के नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, संगठन से जुड़े सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के अलावा राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
स्मृति ईरानी का नाम भी चर्चा में
नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और व्यापक राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें किसी महत्वपूर्ण राज्य का संगठनात्मक दायित्व दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा है।
हालांकि, छत्तीसगढ़ का प्रभार स्मृति ईरानी को सौंपे जाने के संबंध में भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल उनका नाम संभावित चेहरों की सूची में ही माना जा रहा है।
सुनील बंसल का अनुभव बन सकता है आधार
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल का नाम भी छत्तीसगढ़ के संभावित प्रभारी के तौर पर लिया जा रहा है। संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी मिलने की चर्चा रहती है।
नई राष्ट्रीय टीम में भी बंसल को राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका दी गई है। ऐसे में पार्टी यदि राज्यों में संगठन को और सक्रिय करने के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देती है, तो उनका नाम भी प्रमुख दावेदारों में माना जा सकता है।
गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी भी संभावित नाम
राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी के नाम भी संगठनात्मक चर्चाओं में शामिल हैं। दोनों नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि पार्टी उनके अनुभव का उपयोग किसी राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी में कर सकती है।
हालांकि, इन दोनों नेताओं को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाए जाने को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नए प्रभारी के सामने होंगी कई चुनौतियां
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार होने के कारण प्रदेश प्रभारी की भूमिका संगठन और सरकार के बीच समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। नए प्रभारी के सामने कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद बनाए रखने, संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और सरकार की योजनाओं एवं संगठनात्मक गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी।
इसके अलावा आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन की रणनीति तैयार करना और पार्टी के जनाधार को और मजबूत करना भी नए प्रभारी की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल स्मृति ईरानी, सुनील बंसल, गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी में से किसी के नाम की छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन सभी नामों को संभावित दावेदारों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छत्तीसगढ़ संगठन की कमान किस वरिष्ठ नेता को सौंपी जाती है।
